कोरोना की महामारी ने फिर एक बार इंसान और उसके पशु-पक्षि के संरक्षण के प्रति आस्था पर सवालिया निशान लगाया है।
जंगली पक्षियो के बाजार में हमेशा पशु-पक्षि को हमेशा बंदिस्त अवस्था में रखा जाता है, साथ ही स्वास्थ्य-संबंधी कोई भी नियम पाला नहीं जाता।
जिसकी वजह से ऐसी जगहों से कोरोना जैसी महामारी का फैलना स्वाभाविक है। साथ ही इतने बड़े पैमाने पर पक्षियों को बाजार में बंदिस्त करने से इनकी प्रजाति भी धीरे धीरे नष्ट होती जा रही है।
https://www.birdlife.org/worldwide/news/extinct-wild-can-these-5-bird-species-come-back-captivity
हर साल कई नियम बनाये जाते है लेकिन फिर भी इन पशु-पक्षियों को गैर-क़ानूनी ढंग से पकड़ा जाता है। यातो इन्हे खाया जाता है, या इन्हे पाला जाता है। और कभी कभी इनको इंसान अपने काम के लिए इस्तेमाल भी करता है।
इनके शरीर से दवाइया बनाने का व्यापार भी बहुत बड़ा है, (जो अधिकतम सिर्फ अन्धविश्वास की देन है। ) तो कभी इन्हे वैज्ञानिक संशोधन के लिए इस्तेमाल किया जाता है। जिनमे अधिकतम इनकी मृत्यु ही होती है। तो कभी इनके बाहरी अंग को, जैसे हस्तिदंत, गेंडे के सींघ या शेर- हिरन का मुँह घर में शोभा बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जिसका भी दुनिया भर में बड़े पैमाने पर गैर क़ानूनी व्यापार चल रहा है।
Poachers in South East Asia
Poachers in Africa
आशिया खंड में जंगली पक्षियों के बाजार की वजह से स्थानीय जंगल से कई पक्षी विलुप्त होने लगे है, जिसके लिए यह बाजार पूरी तरह से जिम्मेदार है। पर यह वैश्विक समस्या है क्यूंकि आफ्रिका और अमेरिका में भी बड़े पैमाने पर पक्षियों को बाजार में कैद किया जाता है। जिसकी वजह से इन पक्षियों की आबादी कम होती जा रही है और कुछ जातिया तो विलुप्त भी हुई है, और कुछ विलुप्त होने की कगार पे है।
यह वैश्विक बाजार अब बंद करना चाहिए, इन पक्षियों के लिए, अन्य वन्य जीवन के लिए और हमारे अपने स्वास्थ के लिए भी।
जानवरो का व्यापार एक वैश्विक घटना है। मगर आशिया खंड में पक्षी-बाजार इतने बड़े पैमाने में फैला है के इसकी गहराई को मापना भी मुश्किल है। हर साल आशिया के पक्षी बाजारों में सेकड़ो जाती के लाखो पक्षी गैर क़ानूनी ढंग से पकडे और बीके जाते है। छोटे जानवर, जैसे चमगादड़, जंगली बिल्लिया, बंदरो और कई अन्य पालतू जानवरो के साथ अक्सर इन बाजारों में छोटे-छोटे पिंजरों में पालने ये खाने के लिए रखा जाता है। जो बीमारी को फ़ैलाने में सक्षम होते है।
एक अनुसंधान के मुताबिक इंडोनेशिया के जकार्ता के मुख्य पक्षी बाजार में मात्र तीन दिनों में २०० से ज्यादा जाती के १९००० पक्षी बिके गए !
यह हमारी शैतानी लालसा को दर्शाती है, जो कितने बड़े शर्म की बात है।
गाते हुए पक्षियों की बेहद बढ़ती मांग जंगल में एक ऐसे vacuum (खालीपन) को बना रही है के जिसके जरिये जंगल के सभी पक्षी अविश्वसनीय संख्यामे मानो पक्षी बाजार में खींचे जा रहे है।
जिसकी वजह से कई संख्या में पक्षीगण तथा कई जातीया विलुप्त हो रही है। इनमे काले पंख वाली मैना, जवन हॉक-ईगल,स्ट्रॉ हेडेड बुलबुल, आदि जाती अब विलुप्त होने की कगार पर है।
Black-winged Myna
Javan Hawk-eagle
Straw-headed Bulbul
Helmeted Hornbill
इस हेलमेट हॉर्नबिल के जबड़े के ऊपर के आकर्षक टोप की वजह से इस पक्षी का नाश हो रहा है।
इसमें हस्तिदंत की तरह बारीक़ नक्षीकाम किया जाता है और उन्हें बेहद महंगे दामों में शौकीन लोग खरीद ते है।
उसी तरह पश्चिम अफ्रीका में, जहा आशिया बाजार के मुकाबले में, थोड़े कम पैमाने में, गिद्धों को शिकार इसलिए किया जाता है क्यूंकि वहा लोगोमे झूठी मानता फैली है के गिद्धों से दवाइया बनती है। इनके अलावा अफ्रीका, अमेरिका आदि खंड से भी कई पक्षी आशिया पक्षी बाजार में खुल्ले आम बिके जाते है।
मानव निर्मित कोरोना संकट ने दिखा दिया के जिस तरह पक्षियों को गंदे माहौल में बंदिस्त रखा जाता है, ऐसी जगह से और भी कई बीमारी का बम फटना तय है।
हकीकत यह है के आम तौर पर जंगली पक्षी से इंसान को किसी भी बीमारी का धोका नहीं है। पर महामारी के संक्रमण में इनका अप्रत्यक्ष रूप से योगदान यक़ीनन है।
SARS, और MERS के बाद आये कोरोना और कोरोना के वर्ग में नहीं आती इबोला, मंकी पॉक्स, और झिका और कई अन्य बीमारिया, जो पशु से इंसान में फैलती है, इस बात को दोहराती है के अब समय आया है के इन बिमारियों की जड़ इन पशु-पक्षी के वैश्विक बाजार में है, जो आशिया खंड में कई देशो मे पाया जाता है।
सिर्फ एक कोरोना वायरस की गलती से हम कितना नुकसान भुगत रहे है! तक़रीबन २०० से अधिक देशो में लोकडाउन करना पड़ा है ।
भले ही पक्षियों से इंसान को किसी बीमारी के संक्रमण की शक्यता नहीं है मगर फिर भी जंगली पक्षियों को गैर-क़ानूनी पकड़ने पर रोक लगनी चाहिए। और यह सिर्फ आशिया तक सिमित न हो।
यह सारे पक्षी फ़ूड-चेन का हिस्सा है याने यह एक दूसरे पर जिन्दा रहने के लिए निर्भर रहते है, और अगर कोई जाती विलुप्त हो जाती है तो उन्हें खाने वाले जीवो पर भी इसका बुरा असर होता है।
क्यूबा और मेक्सिको में Painted Buntings की बढ़ती मांग की वजह से इसे पकड़ा जा रहा है। इसी तरह पुरे दक्षिण अमेरिका में वन्य पक्षी की मांग बढ़ रही है। न सिर्फ बेहद सुन्दर दिखते तोते बल्कि Toucans पक्षी भी बड़े पैमाने पर पकडे जाते है । इनके अलावा दूसरे गाते पक्षी भी अक्सर पिंजरो मे पाए गए है।
दक्षिण अमेरिका के रेड सिस्किन के केनरी पक्षी के साथ क्रॉसब्रीड या संकर नस्ल होने की क्षमता रखने की वजह से इन पक्षियों की भी मांग इतनी बढ़ रही है के इस जाती के पक्षी भी विलुप्त हो रहे है।
पक्षियों का जागतिक व्यापर रोकना ही इन सुन्दर पक्षियों और अन्य वन्य जीवन के विलुप्त होने पर अंकुश ला सकता है।
अमेरिका ने १९९२ में, तथा यूरोप ने २००७ में ही इन पशु-पक्षियों के बड़े पैमाने पर होने वाले आयत पर रोक लगा दी थी। यूरोप में नागरिको के अच्छे स्वास्थ के लिए इस व्यापार को रोकने पर प्राधान्य दिया गया ।
ब्रिटेन में एक कैद तोते की H5N1 याने इन्फ्लुएंझा से मौत होने की वजह से सरकार ने तुरंत इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पक्षियों के व्यापार पर कड़क प्रतिबन्ध लगाए। क्यों की इसी बीमारी ने आशिया में कुछ लोगोकी जाने भी ली थी।
मगर २००३ में MERS महामारी की वजह से रोक लगाने वाले कायदे बाद में हटाए गए !
चीन ने भी कुछ वन्य जीवन के व्यापार पर रोक लगा दी थी और कोविद-१९ के चलते आंशिक तौर पर कुछ और वन्य जीवन पर भी रोक लगा दी।
न सिर्फ चीन बल्कि पूरी दुनिया को इन्ही पशु-पक्षी को खाने की लालसा ने कोविद-१९ जैसी अत्यधिक संक्रमण वाली बीमारी दुनिया भर में फैली है, लोग घरो में बंद है ।
यह सिर्फ एक कार्टून नहीं है मगर दुनिया की सच्ची तस्वीर है जो कोरोना की महामारी में हम भुगत रहे है। इंसान ५०-६० दिनो तक घर में कैद है और पशु-पक्षी हमारे क्षेत्र में घूम रहे है !
पशु-पक्षी की अवैध तस्करी पर न सिर्फ चीन में रोक लगानी होगी पर पुर विश्वमें इसे लागु करना होगा और साथ ही सिर्फ कुछ जाती पर नहीं लेकिन सारे जाती के व्यापार पर, उनके खाने पर प्रतिबन्ध लगाना होगा। वर्ना जल्द ही फिर से यह बीमारिया हमारी थाली में परोसे जाएगी और हम इसी तरह सर्वनाश की और बढ़ते जायेंगे ।
दुनिया भर से इन पशु-पक्षी को कैद करने की प्रथा हमें बंद करनी चाहिए । ताकि न सिर्फ पशु-पक्षी सलामत रहे पर हम भी सुरक्षित रहे, साथ ही हमारी अर्थव्यवस्था को भी बनाये रखे और इन जीवों को खाने की या पालने की लालसा हमें बर्बाद न करे।
हमें न सिर्फ कड़े कानून बनाने होंगे, साथ ही उनमे छुपे हुए लूपहोल्स या बचाव मार्ग बंद करने होंगे। कई देशो में कानून होकर भी गैर-क़ानूनी तरीके से पक्षी का व्यापार खुल्ले आम चल रहा है। वन्य अधिकारी से बढ़कर तस्करों की ताकद बढ़ी है क्यूंकि कानून सख्त नहीं है, या भ्रष्ट सरकारी लोग पैसे की लालच में इन तस्करो को बचा रहे है। जिसका फायदा तस्कर उठाकर इस गोरखधंदे में इतना पैसा बनाते है के न सिर्फ वन्य अधिकारी को मानते है साथ ही पोलिस की या कानून की भी परवाह नहीं करते।
अफ्रीका, मध्य-दक्षिण एशिया में तो कई वन्य अधिकारीयों की निर्मम हत्या की गयी है। इसीलिए कानून का सकती से पालन होना आवश्यक है। व्यवस्था के भ्रष्टाचार को मिटाना उतना ही जरुरी है।
महामारी की वजह से न सिर्फ मनुष्य हानि हो रही है बल्कि कई देशो की आर्थिक स्थिति भी चरमरा गयी है, जिसमे अमेरिका तथा यूरोप के कई देश, जो दुनिया में सबसे शक्तिशाली देश है, सबसे आमिर है, उनकी अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे ख़त्म होने जा रही है । धीरे धीरे कुछ देश विनाश की और बढ़ रहे है! दुनिया में ५० करोड़ लोग बेरोजगार हुए है। दुनिया की तरक्की दस-बीस पीछे जा रही है।
कइयों की जाने गयी है, वे सारे अपने अपने क्षेत्र में कुशल थे। उनकी कमी भरने में हर देश को काफी समय लगेगा। जिसका सीधा असर अर्थव्यवस्था पर होने वाला है।
जैसे भारत में कई प्रगट राज्योंमे काम करते मजदुर जो दूसरे राज्यसे काम करने आये थे, महामारी के बढ़ते, जान बचाकर अपने गावो की और जा रहे है, इनमे कई तो सामान के साथ हजार किलोमीटर पैदल चल रहे है, जो दर्शाता है के अपनी जान बचने के लिए वो चलकर अपने गांव जाने को तैयार है और जा भी रहे है। और यह संख्या लाखो में है । यह भी आर्थिक स्थिति को नुकसान देय है।
और यह हालात तब तक बिगड़ते रहेंगे जब तक इस महामारी का टिका न खोजा जाय, तब तक इसका संक्रमण फैलता और बढ़ता जायेगा, क्यूंकि हम आर्थिक स्थिति को सँभालने के चक्कर में खुद को सुरक्षित (Social Distance) भी नहीं रख पा रहे है, इसलिए जितनी कोशिश आर्थिक चक्र को गतिमान करने की जाएगी, खतरा उतना ही बढ़ता जायेगा। इससे बचने किए लिए मनुष्य का एक दूसरे के संपर्क की दुरी बनानी पड़ेगी जो उत्पादन को धीमा और कम करती जाएगी।
अब कोरोना के पश्चात् हम इस जागतिक पशु-पक्षी व्यापार को और नहीं झेल सकते।
हमें हमारी लालसा को त्याग कर खुद की तरक्की पर ध्यान देना चाहिए। जिसकी जहा जगह तय है उसे वहा से हटाना नहीं चाहिए।
हमारी तरक्की के लिए हमें यह त्याग करना कितना जरुरी है यह कोरोना ने हमें दिखा दिया है ।
कोरोना हमारे लिए एक बड़ी चेतावनी है और अगर इसे हम अब भी नहीं समझे तो हमारा सर्वनाश तय है।
वि वा











MERS
No comments:
Post a Comment