आम तौर पे कोई पर्बत से गिरा तो लुढ़कते लुढ़कते निचे गिर जाता है और मर जाता है, और अगर कोई चमत्कार हो तो गंभीर रूप से जख्मी हो जाता है, मगर बच जाता है ।
पर अगर मै आपको यह कह दू की लदाख में ऐसा पर्बत है जिसकी चोटी से आप अगर गाडी से निचे जाने की कोशिश करे तो, उसकी गाड़ी निचे जाने के बजाय ऊपर की ओर खींची चली जाती है !!!!
खा गए झटका? ऐसी भी एक जगह है और वह भी हमारे भारत में!
इससे जुडे कुछ सिद्धांत दंतकथा में दबे है तो कुछ तार्किक है।
दंतकथा में पौराणिक आधार पर यह माना जाता था की यहाँ से स्वर्ग को सिधा रास्ता जाता था। जिन्होंने जिंदगी में कोई गुनाह नही किया, वे अपने आप इस रास्ते से ऊपर स्वर्ग की ओर खींचे चले जाते थे और जो पापी है उन्हें ऊपर जाना मुमकिन नहीं था।
दूसरा सिद्धांत बड़ा ही तार्किक या समझदार है जो काफी प्रसिद्द भी है। ऐसा माना जाता है की पर्बत के शिखर से चुम्बकीय किरणे निकलती है और उसका प्रभाव जितनी दूर फैलता है, अगर कोई वाहन उस दायरे में आ जाये तो वो शक्ति उसे ऊपर खिंच लेती है।
इस लेह-कारगिल महामार्ग से जितने दुनिया भर के सैलानी गुजरे है उन्हें इसका अनुभव हुआ है। बात यही तक नहीं रुकी, भारतीय वायु सेनाने किसी भी हवाई जहाज को इस इलाके से न गुजरने की ताकीद दी है, ताकि उन्हें किसी चुम्बकीय हस्तक्षेप का सामना न करना पड़े ! और कोई दुर्घटना न हो |
प्रकाशीय भ्रम सिद्धांत
और एक सिद्धांत है जो इस चुम्बकीय ऊर्जा वाले सिद्धांत को मानता नहीं। यह सिद्धांत कहता है की यहाँ प्रकाशीय भ्रम सिद्धांत याने OPTICAL ILLUSION THEORY काम कर रही है।
यहाँ लोगो को ऐसा भ्रम पैदा होता है कि सड़क, जो वास्तव में निचे कि और जाती है ऐसा भ्रमित करवाती है के वो नीचे की बजाय ऊपर कि और अपने आप जाती है।
कुछ और घटनाये
ऐसे लोग हैं जो मानते हैं कि मैग्नेटिक हिल्स को ग्रेविटी हिल्स के रूप में जाना जाता है जिसे पूरी दुनिया में देखा जा सकता है। ग्रेविटी हिल्स के कुछ लोकप्रिय उदाहरण क्रमशः गुजरात में तुलसीश्याम, स्कॉटलैंड और चीन में इलेक्ट्रिक ब्रे और गांसु आदी हैं।
सरकारी अधिकारियों ने इस क्षेत्र में एक बैनर लगाया है, जहा से इस घटना को देखा जा सकता है। जिस जगह पर गाड़ी को न्यूट्रल में खड़ी करनी है उस जगह पर चिह्नित एक पीला बॉक्स किया गया है, उसमे सटीक बिंदु को अंकित किया है। वहां से इसे धीरे-धीरे पहाड़ी पर चढ़ते देखा जा सकता है। जबकि यह सड़क साल भर खुली रहती है, चुम्बकीय पर्बत की यात्रा का सबसे सही समय जुलाई और अक्टूबर के बीच है। इस दौरान सड़कें साफ रहती हैं और गाड़ी चलाने में कोई परेशानी नहीं होती है ।
यहाँ आने पर कुछ बातो का लोगो को ख्याल रखना होगा : चुम्बकीय पर्बत लेह से लगभग ३० किमी दूर, एक बंजर क्षेत्र का हिस्सा है। इसलिए चुम्बकीय करिश्मा देखने वाले सैलानी के अलावा और किसी हेतु के यहाँ कोई नहीं आता। जबकि आपको क्षेत्र में कुछ गिने चुने रहिवासी मिल सकते हैं।
लेह शहर में एक होटल में चेक-इन करने के बाद, इस चुम्बकीय पर्बत तक आने के लिए होशियारी इसीमे है की आप गाड़ी से आये। रास्ते मे आप को खाने की सुविधा नहीं मिलेगी, इस रहस्यमय पहाड़ी की यात्रा पर जाने के लिए आपको अपने लिये खाने का इंतजाम करना ही पड़ेगा।
यहाँ जाने के लिए जो व्यवस्था है उनमे पहिली हवाई यात्रा है| यहाँ से ३ कि.मी. की दुरी पर लेह इंटरनेशनल एयरपोर्ट है और वहा से आप लदाख मैग्नेटिक हिल के लिए टेक्सी कर सकते है, जो लेह-कारगिल-बाल्टिक राष्ट्रीय महामार्ग पर स्थित है।
दूसरा पर्याय कुछ लम्बा है, ७०० किमी दुरी पर जम्मूतवी रेलवे स्टेशन है, जो देश के सभी बड़े शहरो से रेल सेवा से जुड़ा है, आगे आपको फिर से टेक्सी करनी पड़ेगी।
अगर रास्ते से जाना है तो मनाली-लेह हाइवे सबसे आरामदायक सफर होगा। यहाँ सरकारी सेवा वाली तथा प्रायवेट बसे भी जाती है।
कुछ लोग मनाली से अपनी निजी गाड़ी से लेह जाना पसंद करते है जो अंतर ४९० किमी है।
ऊपर दिए हुए सिद्धांतो के अलावा कोई अन्य सिद्धांत या मान्यता नहीं है जो इस राज का खुलासा कर सकती है।
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| सरकारी सुचना |
सिम्बायोसिस कौशल्य आणि व्यावसायिक विद्यापीठ के वर्गीस खान ने अपनी किताब The Truth Behind the Mysterious Magnetic Hill of Ladakh में लिखा है की यहाँ अगर अपनी गाड़ी न्यूट्रल में खड़ी करोगे तो गाड़ी अपने आप २० कि.मि. की रफ़्तार से ऊपर की और चढ़ती है !
यहाँ टेक्सी ड्राइवर आते ही गाड़ी का इंजन बंद करता है ताकि सैलानी अपने आप चलती या ऊपर कि और खींचती जाती गाड़ी का रोमांचक अनुभव ले सके, जो उन्होंने अब तक सिर्फ सुना था।
तंत्रिका विज्ञान में ऑप्टिकल भ्रम में ऐसी धारणा है; जिसका आम आदमी की भाषा में मतलब है कि आप या तो कुछ ऐसा देखते हैं जो वहां बिल्कुल नहीं है; या आप उन चीजों को उसके मूल रूप से विपरीत देखते हैं । इन ऑप्टिकल भ्रमों में से एक ग्रेविटी हिल है; जिसका अर्थ है कि एक बहुत ही मामूली उतरती ढलान दिखने मे ऊपर की ओर जाने वाली एक ढलान लगती है।
यदि क्षितिज बाधित हो जाता है, तो हमारा मन भ्रमित हो जाता है और अक्सर चीजों को क्षैतिज या ऊर्ध्वाधर होने का अनुभव करा सकता है जबकि वे वास्तव में नहीं होते हैं। यह भ्रम काफी हद तक मून इल्यूजन के समान है; जहां चंद्रमा क्षितिज से बहुत बड़ा दिखता है।
लद्दाख में हमारे मैग्नेटिक हिल पर भी यही अवधारणा लागू होती है। यह विशुद्ध रूप से एक प्राकृतिक ऑप्टिकल प्रभाव है जो क्षितिज को बाधित करने वाली पहाड़ियों के विशिष्ट लेआउट के कारण होता है। सड़क का वह छोटा सा हिस्सा जो वास्तव में ऊपर की ओर जाता हुआ प्रतीत होता है वह वास्तव मे ढलान पर है; और यही वजह है कि कारें धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ती हैं। इस खिंचाव पर आपकी आंखों के सामने की पहाड़ियों को स्वाभाविक रूप से इस तरह से रखा गया है कि वे आपके दिमाग को धोखा देंगी; और यह विश्वास करने के लिए कोशिश करेगी कि आप ऊपर जा रहे हैं। चूंकि आपकी आंखें क्षितिज को स्पष्ट रूप से नहीं देख सकती हैं, इसलिए आपके मन के विरोधाभास का कोई रास्ता नहीं है।



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