कई साल पुरानी बात है ।
एक बडा सा गाव था। जिसमे एक देवी माँका मंदिर था।
मंदिर मे देवी माँ कि भव्य मुर्ती स्थापित थी ।
मंदिर मे देवी माँ कि भव्य मुर्ती स्थापित थी ।
मंदिर की रखवाली एक पुजारी करता था। न सिर्फ उस गाँव मे, बल्के दुर दुर तक लोग शांती से रहते थे।
मंदिर के पुजारी को इस बात की बडी चिंता होने लगी । वो काफी दु:खी हो गया।
जो लोग मंदिर मे आते थे, उन सभी को वह समझाता था, कि यह सब गलत हो रहा है। यह घोर पाप है, इसे करनेवाला और सहनेवाला दोनों भी पापी है । मगर उसकी बातों का किसीपर भी कोइ असर नही हो रहा था। मानो जैसे कोई अराजकता फैली हो!
उसने खुब सोचा! काफी सोच-विचार करने के बाद उसे एक तरकीब सुझी! तरकीब क्या, मानो कोइ खतरनाक चाल थी!
उसने दुर के एक गाँवसे एक लडके को, जो उसके दुरका रिश्तेदार था, मंदिर बुलाया अौर उसे अपने विश्वास मे लेकर अपने मन की बात बतायी! लड़के को उसने कहा की वो रोज रात को चुपके से मंदिर आये अौर उसके काम मे मदत करे! साथ ही उस से यह वचन भी लिया की वो इस बात को राज ़ही रखेगा, क्यूंकी यह सारे समाज के हित मे था, हालाके इसमे बडा ही खतरा था!
उसने आगे लडके से कहा : "तेरा इस मंदिर मे रहना भी सभी के लिये एक राज रहेगा! किसीको पता नही चलना चाहीये की तू इस मंदिर मे रहता है! "
लोगों के अच्छे दिनो के लिये वह साहसी लडका राजी हुआ, पर यह भी तय हुआ था के काम पुरा होने पर वह चुपचाप इस गांव से निकल जायेगा!
जल्द ही एक बडा त्यौहार आया। जिसकी वजह से मंदिर मे न सिर्फ उस गाव के, बल्के दुर-दुर से भी कई श्रद्धालू आये थे।
लोगों की बडी भीड देख कर पुजारी ने तय किया की यही सही समय है, अपनी बात मनवाने का !
उसने बडे धैर्य से सबसे निवेदन किया की सारे खामोश रहे अौर उसकी बात ध्यान से सुने!
उसने आगे कहा: "कल रात मेरे सपने मे, इस देवी माता ने दर्शन दिये!" थोडा सा रुक कर उसने लोगों के हावभाव का निरीक्षण किया।
उसने आगे कहा: "पर वोह बडी दु:खी थी ! उसने सिर्फ इतना कहा की मै फिर आउंगी, मगर १० दिन बाद !"
यह सुनकर सारे उपस्थित लोग चकित हुए! उलझन मे पड गये! अौर पुजारी से लगातार कई सवाल पुछने लगे!
मगर पुजारीने सभी को इतना ही बताया, "मुझे इस से ज्यादा कुछ पता नही! दस दिन बाद जब देवी माँ मुझे फिर सपने मे दर्शन देगी तभी सभी बातों का खुलासा होगा!"
इस दौरान, पुजारी उस लडके की सहायता से हर रात अपने काम को अंजाम देने लगा !
सबसे पहिले, उसने देवी माँ की मुर्ती के पिछे एक बडासा परदा लगवाया। ताकी मुर्ती के पीछे का नजा़रा किसी को दिखायी न दे !
किसी को कुछ पता नही चल रहा था की मंदिर मे क्या चल रहा है ! कुछ लोगोने जरुर पुछा की आखिर यह परदा क्यू लगवाया है? पुजारीने झुठ कहा की वो मंदिर को सुशोभित कर रहा है ! तो किसीने मदत करने की इच्छा जतायी, जिस पर पुजारीने हंसकर कहा, "नही कोइ बडा काम नही, मै खुद कर लुंगा, अगर जरुरत पडी तो निश्चित आपको कहुंगा!"
फिर एक रात पुजारी ने छीनी-हथोडी लेकर मुर्ती की दोनो आंखोमे २ छोटे-छोटे छेद किये!!
अौर फिर सरके पीछे एक बडा छेद किया !
मुर्ती काफी बडी होने की वजह से आंखोमे किये हूए छोटे छेद किसी को नजर नही आ रहे थे ! और पर्दे की वजह से पिछे का नजारा भी छिप गया था !
फिर उसने परदे के पिछे दो मोटर लगाये अौर दो ड्रम भी रखे! उसके बाद उसने २ पतले अौर लम्बे प्लास्टिक के पाईप लिये अौर मोटर से जोड़कर उन दो ड्रमो में पाईप डाले !
उसने पाइप के दुसरे छोर, मुर्ती के सर के पिछे किये हुए छेद से अंदर डालकर दोनो आंखो के छेद मे बखूबी चिपका दिये !
मुर्ती के पीछे लगाये हुए परदे की सहायता से उसने पाईप भी चतुराईसे छुपा दिये थे !
फिर दसवे दिन, लोगों के आने से ठिक पहिले, पुजारी ने पर्दे के पिछे रखे हुए एक ड्रम मे लाल पानी भरा जो दिखने मे खुन जैसा लग रहा था, तो दुसरे मे दुध रखा !
अब लोगों के आने का वक्त हो गया। लोग दुर दुर से मंदिर आये, उनमे बडी उत्सुकता थी की आज क्या होगा ?
क्या उन्हे कोइ चमत्कार देखने मिलेगा?
पुजारी की देवी माँ की द्रुष्टांत वाली बात चारो तरफ मानो आग की तरह फैली थी। इसिलिये सेकडो लोग वहा जमा हुए !
लोगो मे कानाफुंसी होने लगी !
'कही देवी माँ बढते हुए गुनाह की वजह से खफा तो नही?। क्या कोइ अनहोनी होगी?
कही माँ प्रकोप तो नही ढायेगी ?
क्या हम सभी पर कोइ आपदा आयेगी?'
क्या हम सभी पर कोइ आपदा आयेगी?'
ढेर सारे सवाल सभी के मन मे उठ रहे थे !
तभी पुजारीने कहा: "लोगो ! कृपया शांत रहीये ! जैसे के आप सभी जानते है की देवी माँ ने दस दिन पहिले मुझे द्रुष्टांत दिया था, मेरे सपनो मे आकर कहा था कि वो फिर मेरे सपने मे दस रोज बाद आयेगी, ठिक वैसा ही हुआ !
कल रात देवी माँ फिर से मेरे सपने मे आयी ! अौर जैसे मैने पहले बताया था कि वह काफ़ी दु:खी थी, कल रात भी वह न सिर्फ दु:खी थी पर क्रोधित भी थी! "
पुजारी की बात सुनकर सभी लोग अचंबित हुए ! सदमे मे आये! इसी बात का उनको अंदाजा था अौर पुजारीने उस बात को छेड कर उनके डर को सच साबित किया ! सारे डर गये !
एक अजीब सी खामोशी के बाद लोगो मे फिर से कानाफुंसी शुरू हुई!
पुजारी ने फिर कहा: "शांत रहिये! शांत रहिये!
उसने आगे कहा :
"देवी माँ ने कहा की यहा बहुत पाप बढ रहा है! गुनाह बढ रहे है! जिससे मै न सिर्फ व्यतिथ हू, पर मै सभी पर काफी क्रोधित भी हु ! मै चाहू तो सारा इलाका, सारे गांव, सब कुछ सैलाब से तबाह कर सकती हूँ !!
सारा गाँव तथा आसपास के सभी इलाके नष्ट हो जायेंगे!
अौर सारे लोग मारे जायेंगे, कोई भी नही बचेगा !
मगर, मै सभी को एक मौका दुंगी! सभी को, यहा अपना अपना पाप, अपने गुनाह, सभी के सामने कबुल करने होगे और मन से सभी लोगोंके बीच क्षमा मांगनी पडेगी अौर फिर कभी भी जीवन मे कोई भी पाप न करने का अभिवचन भी देगा ! तभी सारे लोग मेरे प्रकोप से बच सकते है अन्यथा, कोई भी नही जिवीत रहेगा! !"
मगर, मै सभी को एक मौका दुंगी! सभी को, यहा अपना अपना पाप, अपने गुनाह, सभी के सामने कबुल करने होगे और मन से सभी लोगोंके बीच क्षमा मांगनी पडेगी अौर फिर कभी भी जीवन मे कोई भी पाप न करने का अभिवचन भी देगा ! तभी सारे लोग मेरे प्रकोप से बच सकते है अन्यथा, कोई भी नही जिवीत रहेगा! !"
पुजारीने आगे कहा की "देवीमाँ ने जो उपाय सुझाया है वह मै आप को अब बताने जा रहा हू ! आप सभी ध्यान लगाकर देवी माँ की बाते सुनिये!
आज आप सारे देवी माँ का चमत्कार अपनी आंखो से देखेंगे !"
सारे लोग नि:स्तब्ध हुए ! जैसे कोइ मोहिनी सी छायी हो!
यह कहकर उसने लोगो मे से एक व्रुद्ध को आगे आने को कहा अौर एक जगह, जहा पुजारी ने पहले से ही सफेद रंग का एक वर्तुल बनाया था, उसके अंदर खडे रहने को कहा !
अौर फिर लोगोंसे कहा: "यहा, इस जगह खडे रहकर, हर व्यक्ती को, सभी के सामने, यह कबुल करना होगा की पिछले दस दिनो मे, उसने कोई नेक काम किया है या कोई पाप किया है।
अगर पुण्य का काम किया है तो देवीमाँ प्रसन्न होगी ! अौर अगर पाप किया है तो देवी माँ क्रोधीत हो जायेगी। लेकिन, सरेआम कबुल करने पर उसे बचने का अवसर भी मिलेगा ताकी वह अपने पाप का प्रायश्चित कर सकेगा ! साथ ही वो सभी के सामने शपथ लेगा की फिर कभी, वह जीवन मे, कभी भी, कोइ भी पाप या गुनाह नही करेगा!"
"अौर, अगर किसीने अपना पाप छुपाने की भी कोशिष की तो उसे देवी माँ उसे बक्षेगी नही, वो अधिक क्रोधी होगी और उसका फल सभी को भुगतना पड़ेगा! तथा गांव मे प्रकोप अटल है अौर तबाही भी निश्चित होगी !"
यह सुनकर सभी उपस्थित लोग सन्नाटेमे आ गये, घबराने लगे! क्या होगा, सोचने लगे ! आपसमे बात करने लगे !
पुजारी ने फिर से सभी को शांत रहने का अनुरोध कर उस व्रुद्ध से पुछा "बताओ! क्या तुमने पिछले दस दिनो मे कोई पुण्य या कोई पाप किया है?"
तब वो व्रुद्ध हाथ जोडकर देवी माँ की मुर्ती की अौर देख कर बोला, "हे देवी माँ! मैने ऐसा कोई भी दुष्कर्म नही किया है ! लेकिन कुछ दिन पहिले एक बकरी के बच्चे को नदी मे डुबने से बचाया था।"
तब वो व्रुद्ध हाथ जोडकर देवी माँ की मुर्ती की अौर देख कर बोला, "हे देवी माँ! मैने ऐसा कोई भी दुष्कर्म नही किया है ! लेकिन कुछ दिन पहिले एक बकरी के बच्चे को नदी मे डुबने से बचाया था।"
जैसे ही उस व्रुद्ध ने अपनी बात कही, पुजारी ने जोर-जोर से घंटा बजाना शुरू किया, जो परदे के पिछे बैठे लडके के लिये एक इशारा था के उसे क्या करना है! लडके ने दुधवाला मोटर शुरू किया! घंटे की आवाज़ जारी रखी इसिलिये उस आवाज मे मोटर की आवाज दब गयी अौर लोगों को सिर्फ घंटे की आवाज सुनायी दी !
पुजारी ने लडके को सारी बाते पहिले से समझायी थी, की कब क्या करना है !
अौर फिर, सबके सामने देवी माँ के दाहीनी आंख से दुध बहने लगा !!
झटसे पूजारी ने उस बहते हुए दुध की तरफ उंगली कर जोरो से लोगों को कहा : "देखिये ! देखिये ! देवी माँ इस व्रुद्ध के काम पर प्रसन्न हुई ! उसकी आंख से दुध बह रहा है!! क्यूंकी उसने पुण्य का काम किया है!"
सभी लोग भोचक्के हो गये ! देवी माँ की जय जय कार करने लगे !! अौर फिर दुध का बहना बंद हुआ !
लोगो पर संमोहनी का असर बढने लगा!
अब बारी बारी सभी लोग, जिसने भी कोई पुण्य का काम किया हो या कोइ गलत काम या पाप किया हो, वो आगे आये अौर यहा इस गोलाकार मे खडे रह कर सभी के सामने कबुल करे !
"ध्यान रहे की कोइ भी पाप छुपाने का प्रयास नही करेगा! देवी माँ से कोई भी बच नही पायेगा !
अगर वह सबके सामने अपना जुर्म कबूल करेगा तो उसके सारे पाप धुल जायेंगे अौर सभी लोग तबाही से बच जायेंगे ! वर्ना देवी माँ का प्रकोप यकिनन होगा अौर न सिर्फ इस गांव को बल्की आसपास के सभी इलाके को बहाड मे बहा देगी, हम मे से कोई भी जीवित नही बचेगा !" पुजारी की आवाज मे धार थी!
पुजारी बात को दोहरा कर लोगों पर मानसिक दबाव पैदा करता रहा। अौर लोगों पर उसका बडा प्रभाव होते दिख रहा था !
एक आदमी आगे आया अौर डरते डरते देवी माँ को हाथ जोडकर बोला "हे देवीमाता! मैने पिछले दिन एक सावकार के घरमे चोरी की थी !" सुनकर वहा खडे चौंक गये, किसी को पता नही चला था किसने डकैती की थी। अब राज खुल गया!
अौर फिर पुजारी ने घंटानाद किया तो देवी माँ की बायी आँख से खुन सा लाल पानी बहने लगा !!
मोटर की आवाज ़फिर से घंटाबाद मे दब गयी !
वह आदमी डर के मारे थर थर काँपने लगा अौर जोरजोर से माफी मांगने लगा।
वह आदमी डर के मारे थर थर काँपने लगा अौर जोरजोर से माफी मांगने लगा।
पुजारी ने कहा: "चुंकी तुमने अपना गुनाह कबुल किया है इसलिये देवी माँ तुम्हे माफ करेगी।"
यह कहते ही मुर्ती के आँखो से लाल पानी बहना बंद हुआ !
पुजारी ने अब तक सभी को अपने वश मे कर लिया था !
सारा परिसर देवी माँ के जय जय कार से गुंज ऊठा था!
धीरे धीरे, एक एक करके सभी ने अपने अच्छे-बुरे कर्मो को बयां किया अौर हर अच्छे कर्मों के बयाँ पर देवी माँ की दायी आंख से दुध अौर हर बुरे कर्मों के बयाँ पर बायी आंखो से लाल पानी बहने लगा !
अौर लोगो के बयाँ खत्म होते ही बहाव बंद होने लगे !
उपस्थित लोगो पर मानो जैसे कोई मोहिनी सी छा गयी थी !
"क्षमा करो, देवी माँ, क्षमा करो! हम कसम खाते है आज से कोई भी, किसी भी किसम का पाप नही करेंगे, हमे बचाईये !, देवी माँ हमे बचाइये! "
हर पापी पुकारने लगा !
सभी ने अभिवचन दिया !
सभी ने अभिवचन दिया !
सारा परीसर गुंजने लगा।
देवी माँ की आँखो से बहते हुए लाल पानी को खुन समझ कर, उसे देवी माँ का प्रकोप मान कर, सारे लोग थर थर काँप रहे थे!
इस घटना का उन सभी उपस्थित लोगों पर ऐसा प्रभाव पडा की चारो अौर इस 'चमत्कार' की खबर आग की तरह फैल गयी अौर रातो-रात, न सिर्फ सारे गांवो से, बल्की सभी दुर-दराज से पाप अौर गुनाह खत्म हुए।
और लोग सु:ख शांती से रहने लगे!!
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