Sunday, April 19, 2020

आओ होते है कोरोना से रूबरू!



दुनिया के कई देश इसकी वेक्सीन की खोज कर रहे है, पर कई जानकारों का कहना है के इसमें साल भी लग सकता है। और इसकी इंसान से इंसान में होने वाली संक्रमण की शक्ति भी कई गुना अधिक है। संक्रमित व्यक्ति के केवल छींकने से भी आसपास के लोगोमे यह बीमारी संक्रमित हो सकती है।

बताया जाता है चीन ने इस महामारी के बारेमे विश्व स्वास्थ संघटना याने  
W H O को भी अँधेरे में रखा। जिस डॉक्टर  ने चीन  सरकार को इस  जानलेवा वायरस की सबसे पहिले जानकारी दी, उस डॉक्टर उसकी आगे चलकर इसी बीमारी की वजह से जान चली गयी।           

अमेरिका का ऐसा आरोप है के विश्व स्वास्थ संघटनाकी भूमिका संदेह के घेरेमें है क्यूंकि चीन के कहने पर इस संस्था के डायरेक्टर जनरल टेडरोस अधानोम इस वायरस का संक्रमण इंसान से इंसान में नहीं होता इस बात पर विश्वास करके सभी को खास करके अमेरिका को आश्वस्त किया।     
   
अमेरिका मोटीसी रक्कम इस संघटना को विषाणु  परिक्षण के लिए देती है।
इसके बावजूद अमेरिका आज इस बीमारी से सबसे ज्यादा परेशान है क्यूंकि न सिर्फ उसकी वित्तीय हानि बढ़ रही है, जिससे संभालना अमेरिका को काफी मुश्किल होगा, वहा लाखो की जान भी जा है। चीन में
भारत की तरह मिडिया को छूट नहीं है। इसीलिए उसने बड़ी आसानी से यह बात सारी दुनिया से छुपाई। साथ ही अपनी दमनशाही के जोर पर राष्ट्रपति शी जिंगपिंग ने सोशल साईट पर पहले ही रोक लगा दी थी।      
वहा व्हॉट्सअप फेसबुक आदि पर रोक है।

https://wwwsaporedicinacom/english/list-of-blocked-websites-in-china/  

यहाँ आप देख सकते है की सोशल मीडिया पर किस तरह चीन ने प्रतिबन्ध लगाया है।

आओ आज हम कोरोना से रूबरू होते है। क्या करता है कोरोना हमारे शरीर में ?

जैसे के हम जानते है की इस कोरोना वायरस डिसीज-२०१९ याने  कोविड-१९ की शुरुवात चीन के वुहान शहर से हुई है। कई बाते साबित कर रही है के इस महामारी का संक्रमण दिसम्बर २०१९ में हुआ और देखते ही देखते चार माह में यह तक़रीबन पुरे विश्व में फ़ैल गया।
  
अब तक जगत के २०८ देशोमे इसका संक्रमण फैला हुआ है।

इनमे ज्यादातर ९६% लोग सौम्य स्तिथि में है, और केवल % लोग  गंभीर स्थिति में है। ९६% के लोगोकी बात करे  तो इनमे ७९लोग  ठीक भी हुए है।हालाकि मौत का आकड़ा (याने २१%) १.५४ लाख के  ऊपर गया है।

जिसमे सबसे बुरे हालात अमेरिका के है, जहा मौत ने तबाही मचायी  है।

आईये जानते है क्या है यह वायरस कोविड-१९?      
कैसे  कोविड-१९ वायरस मतलब कोरोना हमारे शरीर पर आक्रमण करता हैक्यों कुछ लोग मर रहे है?          और कैसे कुछ लोगोंका इलाज चलता है?

कोरोना एक किसम का वायरस है जिसके लक्षण आम बुखार, सार्स (Severe Acute Respiratory Syndrome) और मर्स (Middle East Respiratory Syndrome) जैसे बीमारी के लक्षण की तरह होते है। 
यह नयी बीमारी है इसमें मर्स और सार्स से बढ़कर कई गुना ज्यादा मौत का खतरा होता है और वह भी दो हफ्तोमे। इसे Severe Acute Respiratory Syndrome Coronavirus 2 (SARC-CoV-2) के नाम से भी जाना जाता है। 
विश्व स्वास्थ संगठन ने मार्च २०२० में महामारी घोषित किया है।
जब यह वायरस हमारे शरीर में प्रवेश करता है याने हम संक्रमित होते है और बाद में इसके लक्षण दिखते हैं। इसे ऊष्मायन काल या इन्क्यूबेशन पीरियड कहते है। जो १४ दिनों का होता है। इस काल में वायरस शरीर में प्रवेश करने के बाद अपने आप को स्थापित करता है। जहा उसका विकास होता है। अगर किसी व्यक्ति को कोरोना हुआ है और अगर वह सिर्फ छींकता है तो  उससे दो मीटर दूर खड़े व्यक्ति शरीर में यह आसानीसे  प्रवेश करता  है, या अगर किसी चीज पर या जमी पर   इसके विषाणु पड़े है और यदि हम उसे जीवित  अवस्थामे (अनजाने में, क्युंकि वह हमारी आंखोको  नजर नहीं आते) स्पर्श करते है और वही हाथ हमारे  चेहरे को लगाते है तब भी यह विषाणु हमारे कोशिका में   प्रवेश करते है और फिर उस पर काबू पाते है। 

कोरोना इंसानी शरीर को हाइजेक करता है।

सबसे पहिले वह हमारे गले में प्रवेश करते है। फिर श्वास नलिका के जरिये यह हमारे फेफड़े पर आक्रमण करते है। फिर वह हमारे फेफड़े को विषाणु बनाने की फैक्टरी बनाते है, जो तेजीसे कई गुना नए वायरस का निर्माण  करती है और यह नए विषाणु अन्य कोशिका पर आक्रमण करते है। और ये तेजीसे हमारी कोशिका को ख़त्म करते जाते है। इस प्राथमिक अवस्था में कुछ लोगोंको बुखार भी नहीं होता और कई मरीज में बीमारी के लक्षण भी नहीं पाए जाते ! यू तो ऊष्मायन काल हर मरीज का अलग-अलग होता है पर औसतन यह पाचवे दिनसे शुरू होता है।

मामूली बीमारी : तक़रीबन सभी मरीजों की यह पहली स्तिथि होती है। दस में से आठ लोगो में यह शुरुवाती के दिनो के लक्षण पाए जाते है। और बुखार और खांसी इसके आम लक्षण पाए जाते है। 
बदन दर्द, गले में दर्द और सर दर्द भी मुमकिन है पर  यकीन से नहीं कह सकते की यह सारे मरीजोमे पाया जाये। कुछ मरीजो मे दस्त और उल्टिया के लक्षण भी पाए जाते है।

किसी किसी मरीजके मामलेमें नाक का बहना भी एक लक्षण माना जाता है।
हमारी प्रतिकारक शक्ति कितनी है उस पर निर्भर करता है के हमें कितना बुखार हो और कितनी बेचैनीसी  महसूस हो और कितना हम इस बीमारीसे लड़ सकते है।
यह वायरस अब तक एक घातक घूसखोर के रूप मे माना जाता है, और पुरे शरीर में साइटोकिन्स नामक  रसायन छोड़ता है जो हमें ताकीद देता है के हमारे    शरीर में कोई गड़बड़ी हो रही है। यह रोग प्रतिकारक प्रणाली को घेर लेता है जिससे हमें बदन दर्द और बुखार जैसे लक्षण नजर आते है। 

कुछ लोगो मे खांसी द्वारा मोटीसी थूंक बाहर आती है। जिसमे अधिकतम फेफड़े की मृत कोशिकाएं  होती है जिसे कोरोना वायरस ने ख़त्म किया होता   है। 


इस परिस्थिति का इलाज करने के लिए बिस्तर में लेटे रहना, खूबसा तरल पदार्थ खाना और पेरेसिटोमोल की दवा खाना, यही इलाज होता है। यह स्थिति सात दिनों तक रहती है। यही वो समय है जब हमारी प्रतिकारक शक्ति और भी बलवान होती  है जो इस कोरोना वायरस से लड़ने में सफल हो जाती है और इस तरह मरीज ठीक होता है।

अगर इस दौरान हमारी प्रतिकारक शक्ति कमजोर पड़ती है तो हमारा शरीर बीमारी के अगले चरण में पहुँच जाता है। 
जन स्वास्थ समूह मे US Centers for Disease Control and Prevention (CDC) और विश्व  स्वास्थ संगठन इस महामारी पर नजर रखे हुए है, अपनी वेबसाइट पर लगातार इस बीमारी की हर नयी  बातों को प्रसिद्ध करते है। 

इसके अलावा यह वेबसाइट इस बीमारी के लक्षण  और खबरदारी लेने के बारेमें भी बताया जाता है।

क्या होता है मरीज के साथ?

यह माना जाता है के इस बीमारी में तक़रीबन % लोग गंभीर अवस्था में पहुंच जाते है। इस समय में अगर  इलाज शुरू नहीं किया तो मरीज के मरने की सम्भावना बहुत बढ़ जाती है। हमारी प्रतिकार शक्ति इस बीमारीकी  गिरस्त में आ जाती है और  पुरे शरीर को वो नुकसान  पहुँचाती है। 

जब यह विषाणु हमारे फेफड़े में प्रवेश करते है तो वहा कोशिका को भक्ष करते है। इसी वजह से शरीर में  ऑक्सीजन घटता है और मरीज तड़प-तड़प कर मर जाता है। यहाँ इंसान के शरीर में विषाक्त याने सैप्टिक
काफी बड़ी मात्रा मे और बहुत जल्दीसे फैलता है, जिससे शरीर में रक्त दबाव याने ब्लड प्रेशर तेजी से घटता है शरीर के अवयव आंशिक रूपसे या पूर्णत:    नाकाम होते है।
फेंफडो मे बड़े पैमाने पर जलन पैदा होने से साँस लेने में कठिनाई बड़ी तेजीसे बढ़ती है, असह्य पीड़ा होती है,  ऑक्सीजन की मात्रा तेजी से घटती है। वह हमारी किडनी में रक्त का संचार रोकता है, जिससे किडनी 
अपना सफाई का काम नहीं कर पाती और अतड़ियो मे भी अंदर से भारी नुकसान होता है यह वायरस इतनी बड़ी मात्रा में हमारे शरीर में जलन पैदा करता है की मरीज की इसमें मौत निश्चित होती है।
अगर हमारी प्रतिकार शक्ति इससे लड़ने में नाकाम हो जाती है तो यह वायरस हमारे पूर्ण शरीर को नाकाम कर सकता है।


यह है कोरोना पेशंट की फेफड़ेकी ली हुई 3D फोटो!
इन हालातो में इलाज काफी तेझ  गति में करना पड़ता है। जिसमे ECMO याने एक्स्ट्रा कोर्पोरियल  मेम्ब्रेनऑक्सीजनेशन से उपचार युद्ध स्तर पर करना पड़ता है इस प्रक्रिया मे मरीज के शरीर से बड़े पाइपों  द्वारा खून  निकालकर  ऑक्सीजनेशन यानि कृत्रिम फेफड़े की मशीन में  डालकर उसमे से कार्बन डायोक्साइड  निकाला जाता है और फिर उसमे ताजा ऑक्सीजन  मिलाया जाता है। याने के उसके खून में जो बीमारी ने  ऑक्सीजन की मात्रा घटा दी थी जिसकी वजहसे कार्बन  डायोक्साइड की मात्रा बढ़ी थी, उसे हटाकर ताजा  ऑक्सीजन मिलाया जाता है। और फिर यह मशीन पम्प  द्वारा फिर से इस खून को उसी कुदरती रफ़्तार में  शरीर में दाखिल किया जाता है।
  


मगर अंत में यह नुकसान इतनी मात्रा में बढ़ता है के हमारे अवयव काम करना बंद करते है और शरीर को जान का खतरा पैदा होता है। वुहान के लांसेट मेडिकल पत्रिका में यह नमूद किया गया है के किस तरह इस महामारी ने पहिले दो मरीजो की जान ली।
यह दो मरीज हट्टे-कट्टे थे। पर यह दोनों काफी समय से धूम्रपान करते थे, जिससे शायद इनके फेफड़े कमजोर हुए थे।
इनमे से एक, जिसकी उम्र ६१ साल की थी उसे अस्पताल में भर्ती करते वक्त एडवांस निमोनिया हुआ था। उसे साँस लेने में काफी परेशानी हो रही थी, जिसकी वजह से उसे वेंटिलेटर पर रखने के बावजूद उसका दिल धड़कना बंद हो गया और उसकी मौत हो गयी। यह मरीज ११ दिन तक मौत से लड़ रहा था और कई यातना झेल रहा था।          
दूसरा मरीज ६० साल का था और उसे सांस लेने में काफी बड़ी मात्रा में तकलीफ हो रही थी। जिसे Acute Respiratory Distress Syndrome मतलब सांस लेने में तीव्र तकलीफ होना उसे भी ECMO मशीन पर रखा गया पर उसका कोई असर नहीं हुआ।
वह एडवांस निमोनिया स्टेज की वजह से और SEPTIC SHOCK  याने विषाक्त आघात से मर गया।              

Acute Respiratory Distress Syndrome symptom.
  
संक्षिप्त में मरीज दस-दस दिनों तक सांस लेने में कठिनाई से तड़प-तड़प कर मर जाता है।सोचिये, कितनी गंभीरता है इस कोरोना के 
महामारी की। 
बात को समझिये और अलगाव याने सोशल डिस्टेंस बनाये रखिये, क्यूंकि संक्रमण के पहिले पांच दिन इसका पता ही नहीं चलता।
इन दिनों जो सर्दी बुखार होता है उसकी वजह SARS भी हो सकता है कोरोना भी।     

V वा                           

1 comment:

manju sharma said...

सार्थक एवं उपयोगी जानकारी।