Chance to
Change.
हमने
अक्सर सुना है की जीवन में बदलाव अनिवार्य है। वर्ना इंसान के जीवन में कोई सुधार नहीं
होगा।
बदलाव, जीवन में नयी चेतनाये, नयी आशाये, नयी खुशिया और नए उमंगो को लाती है।प्रकृति
हमेशा अपने नियम से चलती है। अगर इंसान प्रकृति के नियम में दखल-अंदाजी करेगा तो उसे
खामयाजा भुगतना ही पड़ता है। प्रकृति अपने आप ही इंसान के उन सभी रोडो को हटाती है, जिसे
इंसान ने पैदा किया है।
यह अधोलिखित नियम है
प्रकृति का।
हर
बार महामारी की कोई न
कोई वजह होती है। उसी तरह कोरोना की भी वजह
है, जाने-अनजाने में यह रिसाव एक
बडीसी संक्रमण में रूपांतरित हुआ और दुनिया के तक़रीबन
२१० देशोमे फ़ैल गया।
कुछ
देशोंने प्रथम चरण में खबरदारी ली जिसमे भारत
है, जो आबादी में
दुनिया में दूसरे क्रमांक में है। यह बहुत
बड़ी बात है, जिसके लिए
पंतप्रधान श्री नरेंद्र मोदीजी और उनकी टीम
का हमें आभार मानना चाहिए। साथ ही डॉक्टर, नर्स,
पैरामेडिकल स्टाफ और सारे पोलिस
दल का भी हमें
शुक्रगुजार होना चाहिए।
भारत
जैसे देशोमे यह काम और
भी बहुत कठिन हो जाता है,
जहा लोगोमे जिम्मेदारी का एहसास जगाना
पड़ता है और वह
भी सो करोड़ लोगो
की आबादी में।
यहाँ, स्वास्थ कर्मी को पथराव, थूँक तथा विलगीकरण के कक्ष में मरीजोंसे मानसिक परेशानी आदि मुश्किलों का भी सामना करना पड़ा। मगर स्वास्थ कर्मी अपना कर्तव्य बजाते रहे ! कुछ स्वास्थ कर्मी आक्रमण में घायल हुए तो कुछ डॉक्टर कोरोना ग्रस्त मरीज का इलाज करते करते खुद इस बीमारी का शिकार हुए, जो बेहद दुःख की बात है।
पोलिस को भी इन सारी बातोंका मुकाबला करना पड़ा।और जाने भी गवायी!
यहाँ, स्वास्थ कर्मी को पथराव, थूँक तथा विलगीकरण के कक्ष में मरीजोंसे मानसिक परेशानी आदि मुश्किलों का भी सामना करना पड़ा। मगर स्वास्थ कर्मी अपना कर्तव्य बजाते रहे ! कुछ स्वास्थ कर्मी आक्रमण में घायल हुए तो कुछ डॉक्टर कोरोना ग्रस्त मरीज का इलाज करते करते खुद इस बीमारी का शिकार हुए, जो बेहद दुःख की बात है।
पोलिस को भी इन सारी बातोंका मुकाबला करना पड़ा।और जाने भी गवायी!
१५
अगस्त १९४७ को जब हम
आझाद हुए तभी से हमारे
देश में, बड़े पैमाने पर शिक्षा का
प्रसार जितना होना चाहिए था उतना नहीं हुआ, जो अफ़सोस की बात है और राजकारणी तथा नेताओंका यह वैफल्य है।
यह
हमारे देश की बड़ी विफलता
थी जिसके लिए सरकार पूरी तरह से जिम्मेदार है।
साथ ही मुस्लिम तथा
अन्य अल्पसंख्यांक वर्ग के तुष्टिकरण की
नीति, आरक्षण की नीति हमें बहुत भारी पड़ी है।
पर
कहते है न के
इंसान भले ही अपना फर्ज़
भूल जाये या कोई गलती
करे, अगर उसे वह नहीं सुधारेगा तो निसर्ग खुद इंसान की गलती सुधारता हैं !
आज
हम कोरोना की महामारी से
झुंज रहे है। दुनिया भर में लाखो
लोगों की मौते हुई
है। किसकी कितनी गलती है इसका आकलन
करने के बजाय हमें
इस बात का एहसास होना
चाहिए की इतने साल
से हम जिस तरह
इस प्रकृति के साथ खिलवाड़ करते आये है, जिसकी हमने जीवन शैली बनाई है, उसकी हमें
सजा मिली है और सिख
भी मिली है।
आज
२७ अप्रैल २०२०। अब तक तीस
लाख से अधिक संक्रमण
और तक़रीबन दो लाख आठ
हजार लोगों की मौत हुई है।
https://www।worldometers।info/coronavirus/
महामारी के आकड़े डरावने है क्यूंकि अभी
तक इसकी कोई भी वेक्सीन का
अविष्कार नहीं हुआ। प्लाजमा ट्रीटमेन्ट, सोशल डिस्टेंस जैसी मुमकिन इलाज और ख़बरदारी जारी
है।
https://vijayguptsut.blogspot.com/2020/04/convalescent-plasma-bridge-to-life.html
टीके का अविष्कार होने में अभी भी साल-दो साल लग सकते है।
https://vijayguptsut.blogspot.com/2020/04/convalescent-plasma-bridge-to-life.html
टीके का अविष्कार होने में अभी भी साल-दो साल लग सकते है।
मगर यह
महामारी अप्रत्यक्ष रूप में हम पर कृपा
कर रही है।
आओ जानते है उन बातों को जो अब हमारी
जिंदगी का हिस्सा बनेगी । शायद इसे हिस्सा बनाने के लिए सरकारी
नियम भी लागू होंगे।
और
अगर फिर भी हम नहीं
संभले, क्यूंकि नियम में नहीं रहने की इंसानी फितरत है, तो शायद आगे
चल कर हमें इससे
भी बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी !
आज पूरी दुनिया
थम सी गयी है। कोरोना के बढ़ते कदम को रोकने के लिए, दुनिया के कई देशो में लोकडाउन
को लागू किया गया है।
कुछ देशो में पूर्णत: , तो कही आंशिक रूप से। इसके अलावा SOCIAL DISTANCING - ISOLATION / अलगावाद याने हर कोई दुसरे से अंतर रखेगा जैसी बातो का हमें अमल करना है जब तक महामारी का टिका बनता नहीं।
कुछ देशो में पूर्णत: , तो कही आंशिक रूप से। इसके अलावा SOCIAL DISTANCING - ISOLATION / अलगावाद याने हर कोई दुसरे से अंतर रखेगा जैसी बातो का हमें अमल करना है जब तक महामारी का टिका बनता नहीं।
सो साल पुराना
कॉन्वेलसेन्ट प्लाजमा के इलाज का तरीका अपनाया जा रहा है। कही पर वह कारगर भी साबित हो रहा है लेकिन
अगर हमें यह महामारी जड़से मिटानी है तो टिका ही इसका इलाज है। हालांकि टीकेसे
इस महामारी का १०० प्रतिशत निर्मूलन भी नहीं होगा।
जिस तरह मर्स तथा सार्स महामारी अभी भी मौजूद है उसी तरह कोरोना भी मौजूद रहेगा।
यह हुई इंसान के गलती की सजा।
जिस तरह मर्स तथा सार्स महामारी अभी भी मौजूद है उसी तरह कोरोना भी मौजूद रहेगा।
यह हुई इंसान के गलती की सजा।
पर कैसा होगा इंसानी जीवन, इस महामारी के बाद?
यह महामारी
हमारे जीवन में कई बदलाव लाएगी। कई नयी मगर अच्छी आदते हमारी जिंदगी का हिस्सा बनेगी।
कई बुरी आदते हमें त्यागनी पड़ेगी।
मै यहाँ दावा नहीं कर रहा हु के हमारी जिंदगी कैसे होगी, हमारा निकट का भविष्य कैसा होगा ?
कहा क्या होगा इसका विश्लेषण नहीं कर रहा हु, लेकिन एक बात पक्की है, यह महामारी हमारी पहले वाली जिंदगी हमसे छीन लेगी, हमारी आदते बदल देगी। चाहे इसके लिए सरकारी नियम ही क्यों न बने !
कोरोना की वजह से हमारे जीवन में जो अधोलिखित नियम बनेंगे उनमे मुखौटा पहनना, शरीर के बुखार की बार-बार जाँच करना, सामाजिक अंतर बनाये रखना (अगर किसीको खांसी-सर्दी जैसी तकलीफ हो उससे)।
हर तरफ यही
नज़ारा होगा, फिर चाहे वो ऑफिस हो, मोल हो या होटल हो। हम चाहे दुनिया
के किसी भी कोने में रहे, यह अधोलिखित नियम हमारी जीवन का हिस्सा बनेंगे। अगर किसी देश में इन नियमो का पालन नहीं होगा तो उसका
भुगतान सिर्फ उस देश को ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया को भुगतना पड़ेगा। क्यूंकि आज के युग में पूरी दुनिया के किसी भी कोने में हम चौबीस घंटे के भीतर पहुंच सकते है, और अपने साथ हम इस बीमारी को भी साथ ले जा रहे है। और इस तरह यह महामारी फिर से उफान पर आएगी।
इसीलिए अब सामाजिक व्यवहार इस बात पर निर्भर रहेगा के हमारे लिए अत्यावश्यक क्या है, उसका चयन करे! यह नियम एक कोशिश होगी, प्रयास होगा।
शायद इसे
लागू करने पर हमें पता चलेगा, कौन सा नियम सही हैं कौनसा नहीं। यह एक प्रयोग की प्रक्रिया है और यही प्रयास हमारे जीवन का अंग
होगा।
पुरे विश्व को इन नियमों के साथ चलना होगा। हमें वुहान, ताइवान आदि शहर हमारे लिए भविष्य में क्या होगा इस बात का संकेत देंगे।
आईये जाने, क्या होगा हमारे जीवन का हिस्सा?
1. लॉक
डाऊन :
हटाते ही जीवन पहले जैसा नहीं रहेगा। सारे ऑफिस, सारे कारखाने एकदम से सुरु नहीं होंगे। यही बात होटल, मोल, बियर बार आदि पर लागू होगी। पहले एक काम करने में जितने लोग लगते थे उससे कम लोगोंसे वही काम कराना होगा। याने कम लोगो से कामकाज किया जायेगा। हो सकता है के काम का बोझा कम करने के लिए मशीन का इस्तेमाल किया जा सकता है।
हटाते ही जीवन पहले जैसा नहीं रहेगा। सारे ऑफिस, सारे कारखाने एकदम से सुरु नहीं होंगे। यही बात होटल, मोल, बियर बार आदि पर लागू होगी। पहले एक काम करने में जितने लोग लगते थे उससे कम लोगोंसे वही काम कराना होगा। याने कम लोगो से कामकाज किया जायेगा। हो सकता है के काम का बोझा कम करने के लिए मशीन का इस्तेमाल किया जा सकता है।
भारत
के लिए खास करके सरकार को इन नियमो को लागू करना बेहद मुश्किल होगा। सो
बात की एक बात! किसी भी व्यापारी संगठन के लिए कोरोना के एक भी मामले को रखना न सिर्फ एक गुनाह
होगा बल्कि इस बीमारी की दूसरी लहर लानेका खतरा पैदा कर सकती है। इसीलिए जो भी व्यापारी-संस्थान
खोल दिए जाएंगे, उन्हें कई कड़े नियमो का पालन करना पड़ेगा। जिसकी निरंतर रिपोर्ट उन्हें
सरकार को देना अनिवार्य होगा।
2 . सामाजिक
दुरी या फिजिकल डिस्टेंस:
यह हमारी दिन चर्या में शामिल होने वाला शब्द हो जायेगा। धीरे-धीरे करके झुण्ड में रहने की हमारी आदत को भुलना होगा। इसे सभी की निजी जीवन में उतरना सरकार की जिम्मेदारी होगी। जो खास करके भारत जैसे देशोमे सरकार के लिए बेहद बड़ी चुनौती होगी, जहाँ आबादी का बड़ा हिस्सा जुग्गी -झोपड़ी में रहता है जो मुश्किल से १० x १० आकार का होता है और उसमे दस बारह लोग एक साथ रहते है। अौर कई इतने गरीब है के मास्क लगाना, साफ़ सफायी की बाते, सोशल डिस्टंस जैसी बाते इनके लिये बेमानी है। ऐसी हालात मे महामारी पर अंकुश रखना बेहद कठिन है।
यह हमारी दिन चर्या में शामिल होने वाला शब्द हो जायेगा। धीरे-धीरे करके झुण्ड में रहने की हमारी आदत को भुलना होगा। इसे सभी की निजी जीवन में उतरना सरकार की जिम्मेदारी होगी। जो खास करके भारत जैसे देशोमे सरकार के लिए बेहद बड़ी चुनौती होगी, जहाँ आबादी का बड़ा हिस्सा जुग्गी -झोपड़ी में रहता है जो मुश्किल से १० x १० आकार का होता है और उसमे दस बारह लोग एक साथ रहते है। अौर कई इतने गरीब है के मास्क लगाना, साफ़ सफायी की बाते, सोशल डिस्टंस जैसी बाते इनके लिये बेमानी है। ऐसी हालात मे महामारी पर अंकुश रखना बेहद कठिन है।
चीन
में लोगों को कतार में खड़े रहने के लिए बकायदा मार्किंग किया गया है। कामकाज की जगह
हो या दुकान हो, सबवे हो या होटल। सभी जगह इन नियमोका कड़ी से पालन किया जाता है। होटेलो मे
जो लोग ग्रुप में खाने को आते है उनको भी अलग अलग बिठाया जाता है।
3. मास्क याने मुखौटा :
हालांकि मास्क कोरोना पर मात देने के लिए सक्षम हत्यार नहीं है, परन्तु चीन में इसका इस्तेमाल करना लोगो के लिए बिलकुल अनिवार्य किया गया है, ठीक उसी तरह जिस तरह हम कपडे पहनते है, अब मास्क भी पेहनाव का हिस्सा बन गया है। जितने भी व्यापारी संघटन या बाजार या हर वो जगह, जहा लोगों का जमावड़ा लगा रहता है, वहा जिसने मास्क नहीं पहना हो उसे अंदर आने की इजाजत नहीं दी जाती है और अगर इसमें कोई चूक हो गयी तो सम्बंधित कम्पनी, दुकान, होटल, मोल आदि पर सरकार कड़ी करवाई करेगी। यहाँ तक अगर कोई आदमी घर के बाहर भी बिना मास्क के निकलता है तो उसे भी दंड भरना पड़ता है।
4. आपकी सेहत बनेगा अब सार्वजनिक रेकॉर्ड! :
अब आप के सेहत का रेकॉर्ड निजी नहीं रहेगा। उसे आपको सरकार के साथ साझा करना पड़ेगा। चीन में हर शख्स का एक ऐप के जरिये क्यू आर कोड (QR Code) बनाया गया है जिसे वैध मापदंड मानकर उन सभी जगहों पर इसकी सख्ती से लागू किया गया है, जहा संक्रमण का इतिहास था। यह ऐप हर इंसान के, कही भी आने जाने का रेकॉर्ड, वह किनसे मिला है आदि बातोंकी खबर रखता है और उस दौरान अगर वह संक्रमित हुआ तो उसका उसकी वैद्यकीय स्थिति के
अनुसार रेड/ऑरेंज/ग्रीन झोन के तहत विलगीकरण किया जाता है।
भारत
में इसी धर्तीपर आरोग्य सेतु ऐप बनाया गया है, हालाकि इसका परिणाम आना अभी बाकी है।
5. बुखार की जाँच अनिवार्य :
अगर इस ऐप से विवरण संतोषजनक नहीं मिलता है तो बुखार की जाँच अनिवार्य होगी। अगर बुखार के लक्षण
पाए जाते है तो उस व्यक्ति को कही भी प्रवेश निषेध होगा और अगर उसकी हालत गंभीर हो तो उसे अस्पताल
में भर्ती कराया जायेगा। फिर चाहे उसे कोरोना हुआ हो या कोई अन्य संसर्गजन्य बीमारी हो।
5. बुखार की जाँच अनिवार्य :
अगर इस ऐप से विवरण संतोषजनक नहीं मिलता है तो बुखार की जाँच अनिवार्य होगी। अगर बुखार के लक्षण
पाए जाते है तो उस व्यक्ति को कही भी प्रवेश निषेध होगा और अगर उसकी हालत गंभीर हो तो उसे अस्पताल
में भर्ती कराया जायेगा। फिर चाहे उसे कोरोना हुआ हो या कोई अन्य संसर्गजन्य बीमारी हो।
कुछ
देशो मे सेहत के रेकॉर्ड वाला ऐप कारगर साबित नहीं होगा, जैसे के भारत में। यहाँ ऐप के ठीक से
न काम करनेकी सूरत में, बुखार की स्क्रीनिंग मशीन किसी भी संस्थामे प्रवेश करने के लिए एक पासपोर्ट
जैसा काम करेगी।
न काम करनेकी सूरत में, बुखार की स्क्रीनिंग मशीन किसी भी संस्थामे प्रवेश करने के लिए एक पासपोर्ट
जैसा काम करेगी।
6. कोरोना की रिपोर्ट:
कोरोना जाँच रिपोर्ट की कॉपी हर इंसान को अपने पास रखना अनिवार्य होगा, यह
साबित करने के लिए के वोह संक्रमित है या नहीं। हर व्यापारी संघटना को किसी व्यक्ति को अपने कार्यस्थल
में प्रवेश करने के लिए नेगेटिव रिपोर्ट मांगना अनिवार्य होगा।
कोरोना जाँच रिपोर्ट की कॉपी हर इंसान को अपने पास रखना अनिवार्य होगा, यह
साबित करने के लिए के वोह संक्रमित है या नहीं। हर व्यापारी संघटना को किसी व्यक्ति को अपने कार्यस्थल
में प्रवेश करने के लिए नेगेटिव रिपोर्ट मांगना अनिवार्य होगा।
7. आपका ऑफिस जाना:
ऑफिस जाना पहले जैसा नहीं रहेगा: लोकडाउन खुलने के बाद सारी की सारी संस्थापनाये
नहीं खुलेगी। जहा मैनपॉवर की जरुरत है वहा कम लोगोंको काम करने की इजाजत होगी।
सरकार ने नियमित किये हुए मैनपॉवर का विवरण सारी संस्थापना को सरकार से साझा करना भी अनिवार्य
होगा। इसका मतलब यह भी रहेगा के घर बैठे कामकाज का स्वरुप भी हमारे जीवन हिस्सा बनेगा और
संस्थापना को अपने मैनपावर का ढांचा उस हिसाब से बदलना पड़ेगा।
ऑफिस जाना पहले जैसा नहीं रहेगा: लोकडाउन खुलने के बाद सारी की सारी संस्थापनाये
नहीं खुलेगी। जहा मैनपॉवर की जरुरत है वहा कम लोगोंको काम करने की इजाजत होगी।
सरकार ने नियमित किये हुए मैनपॉवर का विवरण सारी संस्थापना को सरकार से साझा करना भी अनिवार्य
होगा। इसका मतलब यह भी रहेगा के घर बैठे कामकाज का स्वरुप भी हमारे जीवन हिस्सा बनेगा और
संस्थापना को अपने मैनपावर का ढांचा उस हिसाब से बदलना पड़ेगा।
8. स्कूली छात्र :
इस महामारी से अधिक प्रभावित होने की शक्यता देखकर अब छात्रों के लिए नए नियम के अनुसार
चीन में ऑनलाइन शिक्षा का प्रावधान किया गया है।
एक रिपोर्ट के अनुसार ३० करोड़ स्कुल के तथा यूनिवर्सिटी के छात्र चीन में ऑनलाइन शिक्षा पा रहे है।
इ-लर्निंग प्लेटफार्म तथा कोर्स के जरिये विद्यार्थियों के लिए शिक्षा देना जारी है।
9. देश-विदेश का सैर सपाटा सिमित हो सकता है ! पर्यटन क्षेत्र एक ऐसा क्षेत्र है जिसमे इस महामारी ने
बहुत बड़ा नुकसान किया है। कई देशों मे पर्यटन ही कोरोना के फैलावे के लिए जिम्मेदार है। इसमें अमेरिका
तथा कई यूरोपियन देश का उल्लेख करना ज़रुरी है। इन देशोंमे जो मौजूदा हालात
पैदा हुए है, उसके लिए सिर्फ पर्यटन ही जिम्मेदार है। चीन के संक्रमित सैलानी, जो इस बात से अनजान थे,
इटली तथा स्पेन गए। उसी वक़्त अमेरिका तथा कई और देशो के सैलानी भी यूरोप देश मे आये। यह
लोग अपने-अपने देश में इस महामारी को अनजाने में साथ लेकर गए।
जब लोकडाउन खुलेगा तब सबसे बड़ी मार इसी क्षेत्र में होगी। हो सकता है के इस क्षेत्रका ढांचा ही बदल जाये।
विदेशी सैलानी इस महामारी को अपने साथ लेकर ही लाएगा, यह सोच लोगोंके मन में घर कर गयी होगी दुर्गम
इलाके में इस बात को साबित करना मुश्किल होगा के आने वाला सैलानी कोरोना बाधित है या नहीं।
जिसके चलते सैलानी को रहने की जगह मिलना असंभव हो जायेगा। साथ ही देश विदेशकी यात्रा भी मुश्किल
हो जाएगी। विमान सेवा कंपनियोंके नए नियमके तहत हवाई जहाज़ में अब दो सीटों के बिच अंतर रहेगा। इस
खर्च के बदौलत यात्रा की टिकट मेहेंगी हो जाएगी।
पैसेंजर को अपने अच्छे स्वास्थ का डॉक्टरी प्रमाणपत्र दिखाना बंधन कारक रहेगा, वह कोरोना से या अन्य
किसी बीमारी से संक्रमित नहीं है। अगर प्रमाणपत्र नहीं है तो बुखार का स्क्रीनिंग करवाना पड़ेगा
या कोविड-१९ ऐप आदी का ब्यौरा दिखाना होगा।
मुमकिन है के हर यात्रा के बाद व्यक्ति को ज़रुरी दिनों के लिए याने १४ दिनोंके लिए विलगीकरण करना
पड़ेगा।
ताइवान ने महामारी की रोक के लिए विशेष टैक्सी चलायी है, जो एयरपोर्ट पर आये सैलानी, जिन पर
संक्रमित होने की आशंका है उन्हें वहा से सीधे विलगीकरण केंद्र ले जायेगी।
https://www.taiwannews.com.tw/en/news/3884436
इन यात्रियों को सार्वजनिक यातायात की सेवाएं भी नहीं मिलेगी।
हर ट्रिप के बाद टैक्सी को निर्जन्तुक किया जाता है और यह टैक्सी आम
मुसाफिर को भी नहीं ले जा सकती है, सिर्फ कोविद- १९ के संभावित लोगों
को ही लेगी।
साथ ही इन सारी टैक्सी के रिपोर्ट सरकार से साँझा होंगे, जैसे मुसाफिर का नाम, उसकी ट्रैवल-हिस्ट्री
याने कहा से आया इत्यादी।
10. साल भर का संघर्ष:
नए सरकारी नियम आम आदमी पर लागु करने में काफी कठिन है। बावजूद इसके के आम आदमी को इन्हे
लागू करना मुश्किल होगा, इन नियमो की आदत उसे लगानी पड़ेगी। इसलिए आम आदमी चाहेगा के महामारी
के पहले की जिंदगी उसे फिर से मिले।
कही भी आने-जाने में उसे कोई रोकटोक नहीं हो। और यह तब ही मुमकिन है जब किसी टिकाका आविष्कार
हो, कोई दवा खोजी जाय। इसलिए विशेषज्ञ का कहना है के कम से कम एक या दो साल तक लोकडाउन को
कुछ काल के लिए लागू करना होगा, और फिर उसे शिथिल करना होगा और यह सिलसिला जारी रहेगा ।
इन बातोंका अंत तब होगा जब इसे जड़ से उखाड़ने वाली टिका का अविष्कार होगा। तब तलक हमारा जीवन
नियमों के आधीन ही रहेगा जो हमारा एक नया जीवन होगा!




2 comments:
अभ्यास पूर्ण विवरण....
Nice description about world lockdown and future
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