Friday, April 17, 2020

अमेरिका और चीन के व्यापार जंग का आगाज और अंजाम!




अमेरिका
 और चीन के व्यापार जंग का आगाज और अंजाम!

विश्वमे अमेरिका और चीन यह दो सबसे बड़ी अर्थ व्यवस्था वाले देश है।चीन का विदेश व्यापार या निर्यात उसके विश्व व्यापार संगठन (वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइज़ेशनमें २००१ में सदस्य होनेके बाद तेजी से बढ़ने लगा। 
इन दो देशोमे सन २०१९ में द्विपक्षीय व्यापार कुल ५५९ अरब डॉलर जितनी हुई।
मगर इसमें अमेरिका का घाटा बढ़ता गया, जिसके चलतेअमेरिकाने चीन के साथ व्यापारी सम्बन्ध तोड़ दिए।
यह बढ़ता हुआ घटासन २०१६मे एक चुनावी मुद्दा भी बना।

एक अमरीकी व्यापार प्रतिनिधि के अनुसारसन २००२ का यह व्यापारी घाटा १०३. अरब डॉलर से बढ़कर सन२०१७ में ३७५. अरब डॉलर हुआजो सन २०१८ में  ३७८ अरब डॉलर हुआ और सन २०१९ में इसके  फलस्वरूप इन दो देशो में व्यापार जंग शुरू हो गया,  जिसके चलते घाटा ३४५. अरब डॉलर पर थम गया। 
  
आओ देखते है क्या है अमेरिका-चीन के बीच  क्या है व्यापार जंग? 
कैसे हुई तू तू मै मै की शुरूवात ?

पहले तो इन दोनों देशोंने आयात पर अतिरिक्त शुल्क लगाया।मतलब दोनों देशोंके व्यापारियोंको अब अपना माल निर्यात करने के लिए ज्यादा पैसे देने पड़े। 
आगे चल कर सन २०१९ में अमेरिका ने ३६० अरब डॉलर से अधिक कीमती के चायनीस माल  पर  इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ा दी। 

इसकी जवाबी करवाई के तहत चायना ने ११० अमरीकी डॉलर कीमती के माल पर आयात   शुल्क बढ़ा दी। 

सन २०१६ में अमरीकी राष्ट्राध्यक्ष श्री डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने चुनावी भाषण में कहा था के वह  चायना केसाथ बढ़ते हुए व्यापारी घाटे को घटाएंगे।

 उनके अनुसार चायना खुद इस व्यापारी  घाटे के लिए जिम्मेदार था।

इन कारणों की वजह से दोनों देशोमे व्यापार जंग का आगाज हुआ।

चायना की नीतिया, जैसे के बौद्धिक सम्पदा की चोरीतंत्रज्ञान का सक्तीसे हस्तांतरणअमेरिकाकी कंपनियों के लिए बाजार प्रवेश में रुकावटे खड़ी करना । 

और चायनीज कम्पनी  को  सरकार ने दी हुई सब्सिडी की  वजह से सरल व्यापार  नीतिमे  कई रोड़े आयी।

दूसरी तरफ चायना अमेरिका पर आरोप लगा रहा था की वो चीन को वैश्विक आर्थिक शक्ति बनने से रोक रहा है।

अब देखते है क्रमशा किस तरह यह जंग शुरू हुआ !

दुनिया के दो चोटी की अर्थव्यवस्थाऔ में २२ जनवरी २०१८ को तनाव  शुरू हुआजब ट्रम्प ने चीन में बने सौर पैनलों और वाशिंग मशीनो पर शुल्क लगाने की घोषणा कर दी। इसके बाद एक दूसरे पर जवाबी शुल्क का हमला शुरू हो गया।

इस व्यापार युद्ध मे अमेरिका ने चीन से आने वाले ५५० अरब डॉलर के उत्पादन पर शुल्क बढ़ा दियाजबकि चीन ने ऐसी ही कारवाई अमेरिका से आने वाली १८५ अरब डॉलर की वस्तुओ पर की।अमेरिकाने चीन पर टेक्नोलॉजी चोरी करने और अनुचित मुद्रा व्यवहार करने का आरोप भी लगाया।चीनकी तकनिकी मामले में बढौतरी की रफ्तारसे अमेरिका और अधिकतर पश्चिमी देश परेशान है।

आओ पढ़ते है क्रमवार सिलसिला इन दो देशो के बीच के व्यापार युद्ध का:

 जुलाई २०१८ :

अमेरिका ने चायनीज माल, जिसमे गाड़िया, कम्प्यूटर, हार्ड डिस्क तथा हवाई जहाज के पुर्जो के कुल ३४ अरब माल  पर २५% आयात शुल्क थोंपा ।  
इसके जवाब में चीन ने अमेरिका के ५३५ प्रकार के माल परजिनकी कीमत ३४ अरब अमरीकी डॉलर थी और जिनमे कृषि उत्पादनगाड़ियासमुद्री खाद्य आदि शामिल थेउनपर २५आयात  शुल्क थोंपा।

२३ अगस्त २०१८ : अमरीकी सरकार ने और १६ अरब डॉलर के चायनीज माल पर २५आयात शुल्क थोंपाजिनमे लोहा तथा इस्पात उत्पादनविद्युत् मशीनरीरेलवे के पुर्जे, साधन और  उपकरण,आदि शामिल थे।
जवाबी कारवाई में चीन ने १६ अरब डॉलर  अमरीकी माल परजिनमे  हार्डी डेविडसन  मोटर सायकलबुर्बोन  व्हिस्की और संतरे का  ज्यूस आदी शामिल थेउनपर २५% आयात शुल्क थोंपा।    

२४ सितम्बर २०१८ : अमेरिकन २०० अरब डॉलर आयात पर १०कर लगाया। जवाबी कारवाई में चायना ने अमेरिका के ६० अरब डॉलर माल पर सिमा शुल्क बढ़ाया।   

 दिसंबर २०१८अर्जेंटीना में हुई जी२० सम्मलेन में अमरीकी अध्यक्ष डोनाल्ड ट्रम्प  तथा चीन के अध्यक्ष शी जिनपिंग  के बीच इस संघर्ष को विराम देने के लिए  बैठक हुई। जिसमे  अमेरिका ने १ जनवरी २०१९ से लागू होने वाले २०० मिलियन डॉलर चायनीज माल की टैरिफ़ १०से लेकर २५कम कर दी। 

१४ दिसंबर २०१८अमरीकी गाड़िया तथा उसके पुर्जे की टैरिफ़ को चीन ने  जनवरी २०१९ से   तीन महीने के लिए निलंबित कर दिया। साथ ही अमरीकी सोयाबिन की खरीदी शुरू कर दी। 

१० मई २०१९ : इन दोनो देश के बीच व्यापार वार्ता फिर एक बार विफल होने पर अमेरिका ने २०० अरब डॉलर के चायनीज माल पर फिर से १०से लेकर २५तक शुल्क बढ़ाया ! जवाबी कारवाई के तहत चीन ने ऐलान किया के वोह ६० मिलियन डॉलर के अमरीकी माल  पर १ जून से शुल्क बढ़ाएगा।   

१५ मई २०१९ : अमेरिकाने हुवै कम्पनी, जो चीन की एक बड़ी टेलीकम्युनिकेशन कंपनी हैउसे अपनी प्रतिबंधित इकाई सूची मे डाल दिया । जिसके अंतर्गत अमेरिका की कोई भी कंपनी, बीना सरकारी इजाजत के, इस कंपनी के साथ कोई भी कारोबार नहीं करेगी।   

३१ मई २०१९ : जवाबी कारवाई में चीन ने कहा की वो अपनी अविश्वसनीय इकाई सूचि जारी करेगी।

 जून २०१९ : चीन ने ६० मिलियन डॉलर के अमरीकी माल पर शुल्क बढ़ाया।

२९ जून २०१९ : फिर एक बार, दोनों देशो के राष्ट्राध्यक्षने अब की बार जापानमें  हुए जी-२०  सम्मलेन में व्यापार-युद्ध विराम के लिए समझौता कियाजिसके तहत ३०० मिलियन  डॉलर के चायनीस माल पर जो २५तक नए शुल्क लादने  की घोषणा अमेरिकाने की थी, उसका अमल  रोक दिया गया   

 अगस्त २०१९ : फिर एक बार हालात बिघडे ! अमेरिका ने ऐलान किया के वह १ सितम्बर २०१९ से ३०० मिलियन डॉलर के चायनीज माल पर अतिरिक्त १०टैरिफ लागू  करने जा रहा है 

 अगस्त २०१९:  चीन की मुद्रा- युआन का दरडॉलर से  अंकोंसे निचे गिर गया  इसके चलते, अमेरिका ने चीन को Currency Manipulator याने अनुचित मुद्रा व्यवहार करने वाला देश जाहिर कर दिया। 

१३ अगस्त २०१९ : हालात फिर संभले ! सितम्बर २०१९ से ३०० मिलियन डॉलर चायनीस माल पर जो अलग अलग टैरिफ़ शुरू होने जा रहे थेउस पर डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा के या तो वह स्थगित किये जायेंगे या रद्द हो जायेंगे। 

१५५ मिलियन डॉलर के चायनीस मालजिनमे फोन, लेपटॉप, कम्प्यूटर तथा वीडियो गेमिंग 
कंसोल आदी होंगे, उनपर थोंपा गया अतिरिक्त १०शुल्क अब १५ दिसम्बर से लागू होगा।

२३ अगस्त २०१९ : दस दिन में हालात फिर बिघडे ! चीन ने ७५ मिलियन डॉलर के अमरीकी माल पर शुल्क  सितम्बर से और १०शुल्क १५ दिसंबर से लागू करने का ऐलान किया ! साथ ही १५ दिसंबर से गाड़िया और उसके पुर्जो पर भी दोबारा  शुल्क लगाने की घोषणा की।                           
 सितम्बर २०१९ : अमेरिका ने भी अपनी तरफ से कदम उठाये। १२५ अरब डॉलर के चायनीज माल पर जो शुल्क की घोषणा उसने की थी वह लागू हो गयी !

११ सितम्बर २०१९ दस दिन बाद, चीन ने घोषित किया के वह १६ किसम के अमेरिकी आयाती माल परजिसमे कीटनाशकपशु-खाद, लुब्रिकेंट्स (स्नेहकऔर कैंसर  बीमारी की दवाएं आदीइन पर जो अतिरिक्त शुल्क लगाया था उसमे कटौती करेगा।

तो दूसरी और चीन के ७० वे राष्ट्रीय वर्धापन दिन को ध्यान में रखते हुए, सद्भावना दिखते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने तय किया के २५० अरब डॉलर के चायनीज माल पर जो नए शुक्ल १ अक्टूबर से लागू होने वाले थे वो अब १५ अक्टूबर से लागू होंगे। 

१३ सितम्बर २०१९चीन ने यह घोषित किया के वोह भी अमरीकी सोयाबीनपोर्क तथा दूसरे कृषि उत्पादन को, इस व्यापार युद्ध की वजह से शुरू किये गए अतिरिक्त शुल्क से मुक्त करेगा। 

११ अक्टूबर २०१९ : अमेरिका ने जाहिर किया के वॉशिंगटन में जो व्यापार से सम्बंधित १५ अक्टूबरको चर्चा होगी उसके बाद २५० अरब डॉलर के चायनीस माल पर जो २५से ३०%  शुल्क बढ़ाने  की घोषणा की थीउसे स्थगित किया जायेगा।

१३ दिसंबर २०१९ : अमेरिका और चीन में व्यापार समझौते के पहले चरण में, (Phase One Trade Dealयह तय हुआ के १६० अरब डॉलर के चायनीज माल  पर १५टैरिफ को हटाया जायेगा।साथ ही अमेरिका ने १२० अरब डॉलर के चायनीज माल पर लगे हुए टैरिफ़ को कम करने की बात भी मान ली।
बदले में चीन ने भी १५ दिसंबर से लागू होने वाले टैरिफ़ को हटा दिया।     

१५ जनवरी २०२० : चीन और अमेरिका ने व्यापार समझौते के पहिले चरण पर हस्ताक्षर किये।इसके तहत चीन अगले दो साल तक अतिरिक्त २०० अरब डॉलर अमरीकी माल तथा सेवाएं  खरीदेगा। इस सौदे ने १६२ अरब डॉलर के चायनीज माल पर, जिस पर दिसंबर में शुल्क लगनेवाला  था उसे भी हटाया।साथ ही ११० अरब डॉलर के चायनीज माल पर मौजूदा १५जो शुल्क था उसेभी आधा किया गया।    

१४ फरवरी २०२० : चीन ने ७५ अरब डॉलर अमरीकी माल परजिसमे मोटर वाहनकृषि उत्पादपोर्कमुर्गियागायका मांस, सोयाबीनरसायनक्रूड तेलव्हिस्की और समुद्री खाद्य आदि समावेश थे, उनपर सन २०१९ से जो अतिरिक्त शुल्क लागू था उसे भी आधा कर दिया। साथ ही अमेरिका से पोल्ट्री उत्पादन को आयत करने पर जो प्रतिबंध लगाया था उसे भी हटाया।

क्या है इस व्यापार संधि का पहिला चरणआइये जानते है।

इस तरह व्यापार जंग संधि के पहिले चरण से जुलाई २०१८ से चलता आया व्यापारी जंग  ख़त्म  हुआ।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और चीन के प्रमुख मध्यस्तवाइस प्रीमियर लियू हे ने अमेरिका के व्हाइट  हाऊस में १५ जनवरी २०२० को इस व्यापार संधि के पहले चरण पर हस्ताक्षर किये।इस संधि के तहत चीन ने अगले दो साल के लिए अतिरिक्त २०० अरब डॉलर अमेरिकी माल को  ख़रीदने की तथा सेवाएं लेनेकी मंजूरी दे दी।

इस अतिरिक्त २०० अरब डॉलर का स्वरुप कुछ इस तरह होगा७७ अरब डॉलर निर्माण क्षेत्र से५२ अरब डॉलर ऊर्जा क्षेत्र से३२ अरब डॉलर कृषि उत्पादन सेऔर ३८ अरब डॉलर सेवा क्षेत्र से होगा ।

ट्रम्प ने यह बताया की चीन ने यह वादा किया है के उसने अमेरिका के ढेर सारे उत्पादको पर जो  प्रतिबन्ध लगाया थाजिसमे गाय का मांससूअर का मांसमुर्गी-पालन, समुद्री खाद,  दूध उत्पाद, चावल, शिशुके  प्रोटीन  खादपशु खाद और बायोटेक्नोलॉजी (जैव प्रौद्योगिकी) आदि  शामिल थेउसे हटाया जायेगा।  
  
इस व्यापार समझौते में अमेरिका ने भी दिसंबर १५ से १६२ अरब अमरीकी डॉलर के चायनीज माल पर जो १५आयात कर जारी था उसे भी रद्द कर दिया।साथ ही तक़रीबन ११० अरब डॉलर आयात पर मौजूदा १५शुल्क था उसे .कर दिया।       

चीन ने भी उसी दिन लागू होनेवाले जो जवाबी शुल्क जाहिर किये थे उनको हटाया।

इस व्यापार संधि के प्रथम चरण को अम्मल में लाने की स्तिथि क्या है, आईये देखते है।

          जिस तरह कोरोना वायरस का जनवरी २०२० से संक्रमण तेजीसे बढ़ रहा थाउसे ध्यान में  रखकर यह सवाल  पूछा जा रहा था की क्या  चीन इस संधि का पालन कर पायेगा

चीन के भूतपूर्व अधिकारी कई बार यह कहते आये है के चीन "यक़ीननइस संधि के तहत  कृषि प्रतिबद्धताओं का कलम लागू करेगा।
पर साथ ही उन्होंने इस बात को भी स्वीकार  किया के इस महामारी के लगातार बढ़ते प्रभाव से, आपात कालीन स्थिति घोषित कर इस संधि को  चीन लागू करेगा या नहीं इस बात पर शंका है।    

अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि रॉबर्ट लइथेझर और अमेरिका के कृषि सचिव सोनी पेर्ड्यू ने कहा: ‘चीन कृषि प्रतिबद्धताओं के लिए ही कदम उठा रहा है।‘ 

फरवरी में चीन ने कुछ पालतू जानवरो के खाद्यपोटेटो चिप्सशिशुके प्रोटीन खादमुर्गी-पालन  और गाय के मांस उत्पाद पर लगे हुए प्रतिबन्ध को हटा दिया, साथ ही कई टैरिफ़ में  छूट दीजिसमे आयातकोंको छूट के लिए आवेदन करने की अनुमति दी गयी। 

इसके सिवा चीनने अमेरिका से पोर्क याने सुवर का मांससोयाबीन तथा चारा खरीदना शुरू किया।

इस व्यापार संधि के महत्वपूर्ण पहलु को पूरा करना चीन के लिए कोविद -१९ के चलते नामुमकिन:

चीन को संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ व्यापार समझौते के प्रथम चरण के एक प्रमुख घटक पर काम करना बाकी हैऔर कोरोना वायरस महामारी एक बाधा बन रही थी।

बौद्धिक संपदा संरक्षण कार्य योजना जिसे अमेरिका ने इस सौदे की आधारशिला के रूप में  माना था – १५ फरवरी को समझौते के लागू होने के ३०  दिन  में  इस  महत्वपूर्ण  योजना  को अंजाम देना चाहिए था। अप्रैल की शुरुआत में तीस कार्य दिवस सैद्धांतिक रूप से समाप्त हो गएमगर तब तक कोई योजना चीन ने बनायी नहीं थी 

हालांकिजनवरी और फरवरी के अंत में लूनर न्यू ईयर की लम्बी छुट्टी के बाद चीनी अर्थ व्यवस्था  पर लॉकडाउन का विपरीत असर देखचीन की कार्य दिवस की परिभाषा अमेरिका के लिए हमेशा  विवाद का चर्चा बन गयी।  

समय की अवधि बढ़ाने की मांग के बजाय चीन ने, ऐसा माना जाता है के चीन ने ये वादा किया की  उसकी कार्य-योजना में कोई देरी नहीं हुई है। क्यूंकि कामकाज के दिन शटडाउन की वजह से  काफी मात्रा में कम हुए।

यह बात अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधिको उकसा गयी और उन्होंने जवाब दिया के मामले को दोनों तरफ के पक्ष जानते है, याने आप हमें समझाने  की या गुमराह  करने की कोशिश न करे।

अमेरिका यहाँ परेशान थी क्योंकि यह योजना पहले से बातचीत किए गए विषय पर आधारित होनी चाहिए थी मगर पिछले साल मई महीने में वार्ता विफल होने की वजह से इस मामले को चीन ने रफा-दफा कर दिया था।

अलब्राइट स्टोनब्रिज ग्रुप के वरिष्ठ सलाहगार तथा शांघाई के अमरीकी भूतपूर्व काउन्सिल जनरल  केन्नेट जेर्रेट ने कहा: "दोनों देशो के बीच अब विश्वास कम होते जा रहा था !"

अगर संधि को पूरी तरह से लागू नहीं किया गया तो यह संधि महज बाते बन कर रहेगी।हमें ये  ध्यान में रखना चाहिए की बौद्धिक सम्पदा की सुरक्षा इस संधि के सेक्शन ३०१ का अहम् हिस्सा है और यह हमारी पहिली कसौटी है।  

एक विश्वसनीय सुत्रों के अनुसार जहा तक चीन के प्रथम चरण के प्रतिबद्धताओं को पूरा करने की बात हैचीन ने अपनी तरफ से ईमानदारी से उसे निभाने की कोशिश की।इसमें अचरज की कोई बात नहीं है। चीन ने जो वादा किया है उसे वो यक़ीनन पूरा करेगा।

मगर एक सूत्र ने यह दावा भी किया है के इस आपदा ने चीन के वचनपूर्ति पर असर डाला है।
क्रोम्पटन ग्रुपजो एक सलाहकार कंपनी चीन में काम कर रही है उसके अधिकारी काइल  सुल्लिवन ने कहा "देरी की बावजूद चीन बौद्धिक सम्पदा की सुरक्षा के मामले में अपने  अभिवचन पर पीछे हटेगा नहीं।उन्होंने आगे कहा "जो भी बाते एक्शन प्लान में तय की गयी है उन सभी की  पूर्ति करने के लिए चीन तैयार है।“ 

अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि को काफी उम्मीद हैचीन के बौद्धिक सम्पदा की सुरक्षा के  अभिवचन पर।  मगर चीन के लिए बौद्धिक सम्पदा की सुरक्षा की अहमियत से ज्यादा जरुरी कृषि  खरेदी करार हैइसीलिए यह चिंता है के उन्होंने अब तक बौद्धिक सम्पदा की सुरक्षा नीति  अपनायी है। 

इस महामारी में दोनों देश एक दूसरे के संपर्क में लगातार है।हालांकि दोनों तरफ से महामारी के दोषी होने का उग्र आरोप भी हो रहा है

वेट मार्केट और आरोप:

चीनका आरोप है के अमेरिकी सैनिकोंने चीन में कोरोना फैलाया है, तो अमेरिका ने आरोप लगाया है के इस वायरस का संक्रमण या तो वुहान की प्रयोगशाला मे रिसाव से हुआ है या यहाँ के वेट मार्केट, याने वो बाजार, जहा जिन्दा जानवर,पंछी तथा कीड़े मकोड़ों को काट कर लोगों को खाने के लिए बेचा जाता है, यहाँ से हुआ है। वेट मार्केट याने गिला बाजार: चूँकि यहाँ अक्सर जानवरों को मारा-काटा डाला जाता है जिसके चलते यहाँ अक्सर खून की नदिया बहती है और उसे हमेशा पानी से साफ किया जाता है, जिसके कारण इसे वेट मार्केट कहा जाता है। जहा कई देशी-विदेशी जानवरों की निर्मम हत्या की जाती है तथा उसे बाजार में लोग खरीदते है, खाने के लिए। जिसमे कई किसम के साप, साही, बिल्लिया, कुत्ते, ऊदबिलाव, बेबी मगरमच्छ, चूहे, भेड़ियों के बच्चे, चमगादड़ का सुप आदी को मार कर उन्हें काट कर लोगो को बेचा जाता है, और वहा के लोग बड़े चाव से इन्हे खाते है, क्यूंकि इनका मानना है के यह पुरुष की प्रजनन शक्ति को बढ़ाता है।

वुहान की प्रयोगशाला मे कई सालोंसे, चीन कई वायरसों पर कई किसम के संशोधन करता आया है और यह माना जाता है की इस प्रयोगशाला में करीब डेढ़ हजार वायरस का संग्रह किया गया है, जो वायरस बैंक के नाम से जाना जाता है। 
आश्चर्य की बात है के इस संशोधन के लिए अमेरिका ने भी धन-सहयोग किया है!    

अब अमेरिका के अध्यक्ष ट्रम्प ने इस महामारी की जहा से शुरुवात हुई थी उस वुहान के प्रयोगशाला की जांच करने का निर्णय लिया है। सरकार का मानना है के वुहान की प्रयोगशाला में ही चमगादड के परिक्षण के दौरान कोरोना वायरस का संक्रमण हुआ था।

जबकि चीन के विदेश मंत्र्यालय ने इस बात का खंडन करते हुए साफ़ कहा के वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन (WHOने भी इस बात की कई बार पुष्टि की है के वुहान के प्रयोगशाला में ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था।  

अमेरिका का गंभीर आरोप WHO पर भी है के उसने अमेरिका को आश्वत किया था के इस वायरस का संक्रमण इंसान से इंसान में नहीं होता।             
जिसके चलते अमेरिका में हवाई जहाज की यातायात जारी थी।  


अमेरिका में मौत का तांडव मचने के पीछे यह यातायात काफी देरी के बाद बंद होने की वजह बताई जाती है।
                    
कोविड-१९ के बारे मे चीन और वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन की भूमिका पर सिर्फ अमेरिका, बल्की दुनिया में कई देश अब संदेह कर रहे है।

 W.H.O.



वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन ने कोविड-१९ के मामले में जो साशंक भूमिका निभाई, और जिस तरह उसके डायरेक्टर जनरल टेडरोस अधानोम ने चीन का ही पक्ष लिया, उसे देख कर अमेरिका ने इस वैश्विक संस्था को धन की आपूर्ति करना बंद कर दिया।

यही से नए विवाद की शुरुवात हुई।

डायरेक्टर जनरल टेडरोस अधानोम ने अपनी जिम्मेदारी सही तरह से नहीं निभायी और चीन के 
अध्यक्ष शी जिनपिंग के साथ करीबी दोस्ती की खातिर उन्होंने वायरस के बारेमे सारी महत्वपूर्ण बाते छुपाई, ऐसा अमरीकी सरकार का आरोप है। टेडरोस अधानोम की इस पद के लिए नियुक्ति भी चीन ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके की है।








Tedros Adhanom


अमेरिका के धन सहायता करना बंद करने पर चीन ने इस विश्व स्वास्थ संगठन को आर्थिक सहयोग देने का तय किया, जिससे चीन और अमेरिका के बीच वाद और बढ़ गया।                                   
अध्यक्ष ट्रम्प ने प्रयोगशाला की जांच के लिए और जानकारिया जुटी और उन्हें हर बात यह प्रमाणित करती गयी के वुहान की प्रयोगशाला से ही इस वायरस का संक्रमण हुआ और यह कितनी तेजी से फैलता है, इतनी गंभीर बाते चीन और संगठन ने छुपाई ऐसा अमेरिका का मानना अधिक दृढ़ होता गया।    









Wuhan Laboratory Building

बीजिंग का मानना था के इस वायरस का संक्रमण पिछले साल (याने २०१९) वुहान के एक जानवर के वेट मार्केट- वुहान सीफ़ूड मार्केट से हुआ होगा। 
मगर धी वॉशिंगटन पोस्ट और फॉक्स न्यूज ने अनजान सूत्रों का हवाला देकर कहा है के यह बड़ी गंभीर और डराने वाली और बेहद चिंताजनक बात है के वुहान महानगर स्थित एक बड़ी, महत्वपूर्ण बायॉरिसर्च सेंटर से, अनजाने में कोरोना के वायरस का संक्रमण हुआ है।

"हम हर मुमकिन कोशिश कर रहे है यह जानने की, कैसे इस अत्यंत खतरनाक वायरस का संक्रमण हुआ और पूरी दुनिया में फ़ैल गया। जिसने पूरी दुनिया मे इतनी बड़ी संख्यामे मनुष्य हानि, वित्त हानि की है, जिसमे सबसे बड़ी मार हमारे देश को झेलनी पड़ी है। अमेरिका के राज्य सचिव माइक पोम्पियो ने फॉक्स न्यूज को बताया।

उन्होंने इन रिपोर्ट को ख़ारिज नहीं किया, और कहा के हम जानते थे के वुहान रिसर्च लेबोरटरी में अत्याधिक संक्रामक वायरस की सामग्री है। इसीलिए उसे वायरस बैंक से जाना जाता है।

अमेरिका जैसे देश में, जहा हर बात में पारदर्शकता अपनायी जाती है, वहा ऐसी बातोंको नहीं छुपाया जाता है, उन पर सरकारी नियंत्रण होता है। ताकि लोगों की सुरक्षा बनी रहे। यही नहीं, विदेशी उत्पादक को सख्त ताकीद दी जाती है की उनके निर्माण के घटक की और उत्पादन के प्रक्रिया की जानकारी सरकार से साँझा करे। काश यह नियम यहाँ (चीन में ) भी लागू होता।" पोम्पियो ने आगे बताया।   

इस वायरस की शुरुवात चायना में ही हुई, यह बात सोशल मिडिया में खूब चर्चित है और साजिश पर गहन करने वालों की राय है के चीन ने यह एक जैविक हत्यार बनाया है, तो दूसरी और चीन के अधिकारियों का आरोप है की इस वायरस को शायद अमरीकी सैनिको ने वुहान में प्रत्यार्पण किया है। 

इस वायरस का संक्रमण जानबूझ कर किया गया है या वुहान की प्रयोगशाला इसी उद्देश्य से बनी है, इस बात की पुष्टि धी वॉशिंगटन पोस्ट या फॉक्स न्यूज नहीं कर रहा है। 

धी वॉशिंगटन पोस्ट के पत्रकार जोश रोगिन का कहना है के जब वो दो साल पहिले वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ़ वायरोलोजी गये थे तब उन्होंने वहा देखा के सुरक्षा का सख्ती से पालन नहीं हो रहा था,  और उन्होंने अपनी रिपोर्ट में साफ लिखा था के यह एक बड़ी आफत बन सकती है। 













Wuhan Institute of Virology


फॉक्स न्यूज के अनुसार चमगादड़ के जरिये सबसे पहले जिस मरीज के शरीर में इस वायरस का संक्रमण हुआ होगा उसी ने पुरे महानगर को संक्रमित किया होगा।

मगर चीन के विदेश मंत्र्यालय के प्रवक्ता ज़हाओ लीजियन दावे के साथ कहते रहे के विश्व स्वास्थ  संगठन के अधिकारी ने कई बार इस बात का खंडन किया है के इस कोरोना वायरस के संक्रमण का कोई भी सबूत, वुहान के प्रयोगशाला में नहीं मिला है।

इन सारी घटनाओने विश्व में सबसे अधिक अमेरिका का आर्थिक नुकसान हुआ है, सबसे अधिक  जनहानी वहा हुई है जो अब तक विश्व में सबसे बड़ी महासत्ता है, वह आज इस कोरोना के महामारी के आगे बिलकुल बेबस बनी है।  
 
उसकी स्वास्थ सेवा, जो विश्व में सबसे बेहतर है, उस स्वास्थ सेवा का भी उसे कोई विशेष लाभ नहीं मिल रहा है, क्यूंकि अमेरिका, भारत की तरह सम्पूर्ण लोकडाउन नहीं कर सकता, उसे अपनी आर्थिक स्थितिको भी बचाना है, ताकि वो महासत्ता बनी रहे। 

इस नजरिये से देखा जाये तो अमेरिका में मरने वाले देश की आर्थिक स्थिति के लिए बलिदान दे रहे है ऐसा कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा।

कुल मिलाकर अमेरिका और चीन के दरम्यान व्यापार युद्ध का दो साल पहिले आगाज हुआ था, और अब उसका अंजाम जैविक युद्ध में परिवर्तित हो सकता है।  

VILAS EKBOTE
08796212032



  


 

 





No comments: