सोचिये अगर आपको कोई उल्टा लटकाये और फिर आपका
गला चिर दे तो ? यकीनन
यह डरावना सपना है !
सर्कस में जानवरो से जोकरों जैसे करतब करवाते है या उनसे सायकल चलायी जाती है जो कितना कृत्रिम होता है, आपको अंदाजा है ?
हम इंसान जानवरो को प्रयोग
के लिए एक चीज वस्तु के हैसियत से इस्तेमाल करते है। प्रयोगशालाओं में इन जानवरों को
जीवनभर कैद रखा जाता है। सालाना करीब-करीब दस करोड़ जानवर, प्रसाधन सामग्री, खाद्य,
दवा और चिकित्सा अनुसंधान के प्रयोगशाला में और कई अन्य प्रयोगशालाओं में मारे जाते
है। यहाँ इन्हे या तो जिन्दा काटा जाता है, या विविध बीमारी के जंतु से टेस्ट किया
जाता है। तो कही इनकी आंखो को अंधे होने तक जलाया जाता है। अफ़सोस ! इस बंदिस्त जीवन
से उनका कोई छुटकारा नहीं होता, अगर होता है तो उनकी मौत से !
हाल ही में भारत के केरल में एक गर्भवती हथनी की दर्दनाक मौत हुई, जो देशभर में सबको हिला गयी। केरल में सुवरो से खेत में होती हानि के लिए वहा के स्थानिक को खुश करने के लिए मंत्रियों ने सुप्रीम कोर्ट से कानून बनवाया के वे अनानास या कलिंगड़ में विस्फोटक भरके खेतो के आसपास रखे ताकि उनको खाने के चक्कर में सुवर मर जाय। इसी वजह से यह हथनी मर गयी।
७. घोड़ो की रेस में उनके प्रशिक्षक से मिलती यातना !
और जिस दिन इन रेसो में
घोड़े का प्रदर्शन बुरा होते जाता है, उसे गोली मार दी जाती है ! यहाँ भी कृत्रिम तरीके
से घोडों का प्रजनन किया जाता है ताकि रेस के लिए घोड़े बाजार से खरीदने नहीं पड़ते। पर इनमे से थोड़े ही रेस में सफल
होते है। जो इंसान के काम न आये उन्हें कतलखाने बेच दिया जाता है।
अगर हम सोचकर ही
डरते है तो सोचिये
उन जानवरो के बारेमे, जिनके
साथ हम हकीकत में ऐसा बर्ताव
करते है!
क्यों
? तो हमारे भोजन के लिए या
उन चीजों को जो हम इस्तेमाल
करते है और वो
बनती है इन जानवरो
को मारकर।
और यह पशुपर अत्याचार
पूरी दुनिया में हो रहा है
! रोज हो रहा है
और वह भी इतनी
बेदर्दी से जिसकी आप
कल्पना नहीं कर सकते।
IF SLAUGHTER HOUSE HAD GLASS WALLS नामकी
विडियो में दिखाया गया है, कितनी बर्बरतासे
इन जानवरों को मारा जाता है। बडे जानवरों को एक पैरसे मशिन लटकाया जाता है अौर गला काट दिया जाता है, या इलेक्ट्रीक गन से भेजे में शोक देकर मारा जाता है ताकी उनके चमडे मे कोई सुराग न हो! कैसे मशिन से उन्हे धकेला जाता है जहा उनकी गर्दन काट दी जाती है, कैसे मशीनो मे एक साथ कई हजारो मुर्गीयों के बच्चों को पिसा जाता है । कई बार बीना मारे खाले उधेड दी जाती है ताकी चमडा न फटे!
तो कभी बछड़े के सर पर हतोड़ा मार-मार उसे मार डालते है !
मध्य आशिया के कई देशो मे खास करके चीन मे वेट मार्किट है, जहा जानवरों पर की हुइ बरबरता सारी सीमाए पार की जाती है। अौर इसी चीन ने इन्ही जानवरो के जरीये जानबुझकर या अंजानेमे पूरी दुनिया को कोरोना जैसी महामारी दी! जो पहली बार भी नही हुआ! जानवरो के जरिये जो बीमारिया हमें मिलती है उन्हें झुनोसिस कहते है, जिसमे कोरोना महामारी लेटेस्ट है। इसके पहिले सार्स, मर्स, बर्ड फ्लू, स्वाइन फ्लू आदि कई बीमारिया हमें इनके जान के बदलेमे ही मिली है।
ईसके पहले जितनी महामारी आयी है फिर वो चीन हो या आफ्रिका, सारी महामारीया जानवरो के जरीये ही हम फैलायी है!
चीन के अलावा विएतनाम, मलेशिया, इण्डोनेशिआ सुमात्रा आदि कई आशियाई देशोमे इन जानवरो पर ऐसे अत्याचार के नए नए तरीके आजमाते है जिसकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते। जिन्हे देखकर आपकी रुंह काप जाएगी। सिर्फ एक बार यु-ट्यूब पर आप IF SLAUGHTER HOUSE HAD GLASS WALLS देखिये, आपका मन खुद को दोषी मानेगा।
इस विडियो में यही बताया है के कतलखाने की दीवारे अगर कांच की होती और आम आदमी यह बर्बरता खुद देखता तो सोचने पर मजबूर हो जाता के, क्या वाकई में उसे उन चीजों की जरुरत है, जिसके लिए इस बर्बरतासे इन गूंगे बेक़सूर जानवरों को मारा जा रहा है?
क्या हमारी भूक इनके खून से ही मिट सकती है?
क्या हमारे फैशन में इनका मांस होना जरुरी है?
तो कभी बछड़े के सर पर हतोड़ा मार-मार उसे मार डालते है !
मध्य आशिया के कई देशो मे खास करके चीन मे वेट मार्किट है, जहा जानवरों पर की हुइ बरबरता सारी सीमाए पार की जाती है। अौर इसी चीन ने इन्ही जानवरो के जरीये जानबुझकर या अंजानेमे पूरी दुनिया को कोरोना जैसी महामारी दी! जो पहली बार भी नही हुआ! जानवरो के जरिये जो बीमारिया हमें मिलती है उन्हें झुनोसिस कहते है, जिसमे कोरोना महामारी लेटेस्ट है। इसके पहिले सार्स, मर्स, बर्ड फ्लू, स्वाइन फ्लू आदि कई बीमारिया हमें इनके जान के बदलेमे ही मिली है।
ईसके पहले जितनी महामारी आयी है फिर वो चीन हो या आफ्रिका, सारी महामारीया जानवरो के जरीये ही हम फैलायी है!
इस विडियो में यही बताया है के कतलखाने की दीवारे अगर कांच की होती और आम आदमी यह बर्बरता खुद देखता तो सोचने पर मजबूर हो जाता के, क्या वाकई में उसे उन चीजों की जरुरत है, जिसके लिए इस बर्बरतासे इन गूंगे बेक़सूर जानवरों को मारा जा रहा है?
क्या हमारी भूक इनके खून से ही मिट सकती है?
क्या हमारे फैशन में इनका मांस होना जरुरी है?
आईये पढ़िए उन सारे तरीको को, जिनको हम अलग अलग क्षेत्र में इन जानवरो पर जुल्म ढाते है। और फिर सोचिये, क्या वाकई मे हमें इतना स्वार्थी होना जरुरी है ?
१.
फर
वाले
जानवरो
के
फर
का
व्यापार:
प्राणियों पर होने वाले क्रूर अत्याचारों में फर उद्योग सबसे अधिक बर्बरता पूर्ण है। फैशन का चस्का हर किसीको होता है, खुद को ध्यानाकर्षक बनाने के लिए फैशन का मोह हर किसीमे होता है।
![]() |
| कोई दया नहीं। |
प्राणियों पर होने वाले क्रूर अत्याचारों में फर उद्योग सबसे अधिक बर्बरता पूर्ण है। फैशन का चस्का हर किसीको होता है, खुद को ध्यानाकर्षक बनाने के लिए फैशन का मोह हर किसीमे होता है।
पर
क्या आप जानते है
आपकी इस जरुरत को
पूरा करने के लिए जानवर
पूरी जिंदगी यातना में तड़पता रहना पड़ता है और अधिकतम
मामलो में वे दम तोड़ देते है। जिन फर कोट को
पहनकर हम इतरा के चलते
है उस फर के
लिए फर वाले जानवर
की जीते जी चमड़ी उधेड़ दी जाती है
और फिर उसे दवा भी नहीं करते
है और जिन्दा तड़पने देते है ।
जिंदगी भर उन्हें छोटे से पिंजरे मे रखा जाता है, जहा वो मुश्किल से
हिल सकते है। उनके मुंह और गुदा चिपियो से दबाये जाते है और फिर
उसके जरिये बिजली के झटके दिए
जाते है !
क्या आप अंदाजा लगा
सकते है उस दर्द
का जिनसे वह गुजरते है
? फर का व्यापार आशिया
खंड में चीन और फिलिपाइन्स देशो
में बड़े पैमानों पर होता है। चीन इन फर वाले
जानवरो को मारने तथा
खाने के मामले में
सबसे आगे है।
और उनकी इसी लालच ने दुनिया को कोरोना जैसी महामारी दी है।
२.
हमारे
पौष्टिक
या
स्वस्थ
नास्ते
के
लिए
मुर्गियों
के
गले
काट
दिए
जाते
है :
यह नजारा तो दुनिये के
हर देश के, हर शहर
के, हर गलियों मे दिखाई
देता है, और यह हम
हमारे बचपन से देखते आये है।
यह बर्बरता तो कतलखाने में नहीं बल्कि हमारे गलियों में, हमारी आंखो के सामने, हमारे कहने पर, की जाती
है और इसलिए हमें बाकी बर्बरता के मुकाबले यह बहुत
आम लगती है।
मुर्गियों के बैदे हमारे नास्ते का अहम् हिस्सा होते है। पर
क्या आप जानते है
के इसके लिए मात्र A 4 पेपर की साईझ के
पिंजरे में दो-तीन मुर्गिया
ठोंस दी जाती है, जहा अक्सर यह मुर्गिया आपस
में लड़ते रहते है। नतीजा यह होता है
के इन बीमार मुर्गियों के
हम बैदे हमारी अच्छी सेहत के लिए बड़े चाव से खाते है और वह
मुर्गिया मांस के लिए काटी जाती है, या बैदो के
लिए बिना किसी वैद्यकीय इलाज के जिन्दा रखी
जाती है।
३.
उनकी पींठ पर सवार होते है हम, पर दर्द होता है उनको :
जानवर पर सवार होकर सफर करना एक बेहद बड़ा व्यवसाय है। और सदियोसे हमारा शौख है। हमारे मनोरंजन के लिए कई जानवरो को कैद रखा जाता है, जैसे
हमने सर्कस में देखा है। कई जगह, जैसे परबत पर मंदिर, मस्जिद या चर्च हो या कोई ठण्ड
पहाड़ी इलाका, जहा सैलानी आते है इन जगहों पर घोड़े खच्चर या गधे जैसे जानवरो को आजीवन
गुलामी में जीवन बिताना पड़ता है। गधो से अक्सर सामान ढोने के काम लिया जाता है, तो कही जंगलो में हाथीसे बड़े वजनदार लकड़ी ढोने का काम करवाया जाता है।
अननुभवी इंसान इन्हे तालीम के नाम पर कई यातना देता
है। पशु-पर्यटन के नाम पर इन जानवरो को लोगो को अपने पीठ पर ले जाना पड़ता है। अक्सर
बार-बार एक काम उन्हें आजीवन करना पड़ता है। कई बार प्रजनन के लिए इन जानवरो पर जोर-जबरजस्ती
होती है। यह सब मानसिक कष्ट है जो यह जानवर कृत्रिम ढंग से झेलते है।
सोच के देखिये आप अगर आजीवन काल किसीके इशारो पर, दमनशाही में जीना पड़ेगा तो आपका क्या हर्ष
होगा ?
४.
अपनी तरकीबों पर हंसाते हुए और अपने साइकिल चलाने के कौशल से चकित कराते हुए यह जानवर
दरअसल गुलामी से बेबस होते है।
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| हाथीको बचपन से ही यातनामय ट्रेनिंग दी जाती है। |
अक्सर हमने सर्कसो में
कई जानवरों को कई करतब करते हुए देखा है, जो आम जिंदगी में वे कभी नहीं करते। इनकी इन्हे
जो जबरन तालीम दी जाती है जो काफी दर्दनाक होती है। इन जानवरो को तब तक यातना दी जाती
है, जब तक वो अपने मालिक की बात नहीं मानते। महीनो तक इनको पीड़ाये दी जाती है।
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| भालू की यातना भरी ट्रेनिंग। |
अधिकांश में इन जानवरो
को इनके बचपन में जंगल से चुराया जाता है और यातनामय तालीम दी जाती है । कही रींछ सायकल
चलाते है, कही हांथी अलग अलग तरकीबे करते है, कही शेरो को आग के गोले से छलांग लगवाते
है। और यह तब तक मार खाते है जब तक यह उनके मालिक की बात नहीं मानते। उनकी आत्मा इस
मार से और बंदिस्त जीवन से मर जाती है।
५.
आंखोकी आयलाइनर और अन्य कॉस्मेटिक्स के लिए जानवरो पर कितने होते है सितम ?
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| कॉस्मेटिक के लिए खरगोश पर टेस्टिंग। |
प्रसाधन उद्योग में जानवरो
पर जो प्रयोग होते है बिना यह जाने के, इन उत्पादन का इंसान पर क्या असर होता है।
६.क्या
हम जानते है के हम हस्तिदंत खरीदते है तो कितनी यातना से हाथियों को मारा जाता है?
दुनिया में हर २५ मिनट
में हस्तिदंत के लिए एक हाथी को मारा जाता है ! हाथी का दांत दो तिहाई ही दिखाई देता है बाकि
का हिस्सा उसके शरीर में होता है। जिसकी वजह से शिकारी हाथी के सर को ही काटते है
! हाथी हमेशा समूह में रहते है जिसके कारण बिना सर के हाथी की लाशे जंगल में एक जगह
दिखाई देती है !
आंतरराष्ट्रीय स्तर पर
इस हस्तिदंत के व्यापार पर रोख लगाने के बावजूद, शिकारी अवैध तरीके से हाथियों की शिकार
करते है। आशियाई बाजार में हस्तिदंत के मात्र १ किलोग्राम का टुकड़ा हजार से डेढ़ हजार डॉलर मे बिकता है। और आमतौर में एक हस्तिदंत १० किलो का होता है। आफ्रिकी हथियों का हस्तिदंत बड़ा होने के कारण इनकी
मांग ज्यादा है, जिसके चलते अफ्रीका में हाथी का शिकार बड़े पैमाने पर होता है।
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| हस्तिदंत |
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| फलमे स्फोटक रख करी गयी गर्भवती हथनी की हत्या ! |
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| दुसरे मामले मे इन्ही स्फोटक फलोसे हिमाचल प्रदेश मे एक गाय की यह हालत की😈 |
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| गेंडे का शिकार |
७. घोड़ो की रेस में उनके प्रशिक्षक से मिलती यातना !
कभी सोचा है, जिन घोड़ो
पर रेस मे आप पैसे लगते हो, जिसे फिल्मो में मनोरंजन का साधन बनाकर, आम जीवन में इसे बड़ा
व्यापार बनाया गया, उन रेसो मे घोड़ो पर कितने अत्याचार होते है? घोड़ो की रेस दुनिया भर में
सट्टे का एक बड़ा बाजार का हिस्सा बनी है। इस बुद्धिमान जानवर को लोगो के मनोरंजन और जुए का
बड़ा साधन बनाया गया है। बड़ी क्रूरता से इनको तालीम दी जाती है और दर्द सहने के लिए
इन्हे कई नशीली और अवैध दवा का भी सेवन कराया जाता है। घोडे का मालिक और पशु चिकित्सक
अक्सर इन्हे ड्रग्ज का खुराक देते है ताकि घोडा हमेशा फिट रहे। मगर इन ड्रग्ज की वजह
से घोड़े की तंदुरुस्ती बिगड़ती जाती है।
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| पैसे के लिए घोड़ों की जिंदगी दाव पर लगाई। |
८.
जब हम मांस का एक टुकड़ा खाते है तब क्या हम सोचते है के किस पीड़ा से वोह जानवर मरा होगा जिसे हम खाते है ?
सोचिये अगर आप किसी मैली
जगह ठूंसकर बांधे गए हो, इस यकीन के साथ के एक दिन आपकी हत्या कर दी जाएगी ? तैयार हो? नहीं न?
पशुपालन व्यवसाय क्षेत्र
में अक्सर जानवरों को इसी स्थिति में रखा जाता है। नयी तकनीकी, नयी मशीनरी के कारण यह जानवर खुले में घूम नहीं सकते। उन्हें एक
जगह जिंदगी भर के लिए बांधा जाता है। उन्हें
अक्सर स्टेरॉयड दिया जाता है ताकि उनमे कृत्रिम तरीके से मांस बढे। आगे चलकर इनमे कई
बीमारिया पैदा होती है और अंत में इन्हे कतलखाने ले जाकर इनकी निर्मम हत्या की जाती है।
बेबस जान !
९.
आपके होटों तक आती चाय की प्याली और उसके पीछे है एक जानलेवा पीड़ा की दास्ताँ !
अक्सर यह कहा जाता है के
डेरी बड़ी स्केरी होती है !
गायों को एक साल की उम्र
में ही कृत्रिम तरीके से गर्भवती बनाया जाता है या कभी-कभी बैल से जबरन सम्भोग करवाया
जाता है ! ताकि वो प्रसूति के वक़्त दुग्धवर्धक हो जाये। जैसे ही बछड़ा पैदा होता है
उसे माँ से अलग किया जाता है ताकि ज्यादा से ज्यादा दूध बेचने के लिए उपलब्ध हो। बछड़ा
अगर नर हो और उसकी तक़दीर अच्छी हो तो किसान को खेत के लिए बेचा जाता है वर्ना कतलखाना तो है ही !, जिसका दाम भी ज्यादा होता है क्यूंकि बछड़े
का चमड़ा काफी नरम होता है। जिसकी बड़ी मांग है, मुलायम बैग बनाने के लिए।
दस महीने में गाय दूध देना
बंद करती है तो फिर से उसे गर्भवती बनाया जाता है और यह कृत्रिम प्रक्रिया गाय को एक बच्चा पैदा करने वाली और दूध देने वाली मशीन बनाती है। इस तरह गाय का दुरूपयोग किया
जाता है। यह तरीका सारी दुनिया में अपनाया जाता है तब तक, जब तक गाय दूध देना बंद नहीं
करती। कुदरती तौर पर गाय २० साल जीती है पर इस तरीके से जो मानसिक तनाव उसे
दिया जाता है,उसकी उम्र घटती है। ५-६ साल के बाद गाय दूध देना बंद करती है और फिर उसे
कतलखाने भेजा जाता है, जहा उसे बेरहमी से मारा जाता है।
इनके अलावा और कई अनैतिक धंदे मे
दूसरे कई जानवरो की हत्या होती रहती है।
झेब्रा, जंगली भैंसा, सूअर,
हिरण, कंगारू, ईल, शार्क, डॉल्फ़िन, सील, वालरस, मेंढक, मगरमच्छ, छिपकली और सांप
जैसे कई जानवर की चमड़ी चमड़े के लिए इस्तेमाल होती है। कई बार चूहे, बिल्ली या कुत्तो
की चमड़िया भी चमड़े के बाजार में इस्तेमाल की जाती है।
हालाकि जब आप कोई चमड़े की
वस्तु लेते है, यह बताना मुश्किल होता है के वह कितने अलग-अलग जानवरो के चमड़ी का मिश्रण है।
मगरमच्छ के चमड़ी की मांग
सबसे ज्यादा होती है।
इस चमड़े के उद्योग के कारण कई जानवरो का अस्तित्व खतरे में आया है।
![]() |
| जानवरो की मृत चमड़ी ही है हमारा चमड़ा। |
हमें यह सोचना चाहिए के
हमारे उपभोग के लिए जिस तरह हम जानवरो पर अत्याचार करते है वोह कितना अनैतिक है।
क्या हम चमड़े के लिए कोई कृत्रिम स्त्रोत का संशोधन नहीं कर सकते है?
वि वा
वि वा
8796212032














1 comment:
ओह, दुखद । बेहद जानकारीपरक लेख ।
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