Thursday, June 11, 2020

मोबाईल आँखे - भाग - २

VILAS
अक्सर हम रात में आकाश की और देखते है, जो तारो से भरा रहता है। यह तारे उनकी दुरी और उनके आकर के हिसाब से हमें दिखते है।

मतलब जो तारा उन तारो के मुकाबले बड़ा है जो तारे हमारे धरती के करीब है, मगर वह बड़ा तारा हमारी धरती से काफी दूर रहने के कारण या तो हमें वह छोटा दिखाई देता है या दिखाई ही नहीं देता। यह बात हमने किताबो में पढ़ी है।

इसी तरह जो तारे हमें नहीं दिखाई देते ऐसे अरबो नहीं, खरबो तारे है। यह सारे तारे या तो हमारे सूरज से छोटे है या कई गुना बड़े।

पर विज्ञान के देन से हमारी आंखो का दायरा काफी बढ़ गया। या यु कहे हमारी आँख धरती से आकाश तक कही भी जा सकती है, सेटेलाइट या टेलिस्कोप के जरिये। 

इसी कारण हम वह सब देख सकते है जो हमारी अपनी आंखोको नहीं दिखाई देता था। 

हम वहा से देख सकते है जहा हम प्रत्यक्ष रूप से नहीं पहुंच सकते। याने अब हमारी आँखे घूमती फिरती हो गयी, जो धरती से लेकर अंतरिक्ष में कही भी घूम सकती है। 

किसी चीज को अलग जगह से या अलग दुरी से या ऊंचाई से देखे तो वो चीज अलग दिखती है और हो सकता है हमें कुछ ऐसी जानकारी मिले जो हमेशा देखने पर नहीं मिलती। क्यूंकि जानकारी का दायरा बदल जाता है। 

यह ठीक उसी तरह है जब हम रस्ते पर खड़े सार्वजनिक गणपति का जुलुस देखते है, मगर अगर वही जुलुस हम बिल्डिंग की छत से देखे तो सारा मंजर पूरी तरह से साफ दिखाई देता है। साथ ही वो बाते भी दिखती है जो रस्ते पर खड़े खड़े नहीं दिखती । 

क्या आपको पता है के अगर हमारी आँखे याने सैटेलाइट जो हमने कई सारे अंतरिक्ष में छोड़े है, या    टेलिस्कोप उनके जरिये हमने अंतरिक्ष के ऐसे नायब तस्वीरें ली है जो आप को बहुत अचंबित कर देगी। 

कुदरत के बेहद खूबसूरत नज़ारे को हम बारी बारी देखते है।

१. हमने धरती से चाँद को कई बार देखा है। पर सेटेलाइट से यह नजारा बड़ा सुहाना लगता है। निले धरती के क्षितिज से एक अंतरिक्ष यात्री ने इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन से जून ७, २०२० को ली हुई यह घटते हुए चाँद की तस्वीर है।

यह दो रोज बाद की तस्वीर है जब चंद्र ग्रहण हुआ था (५ जून २०२० का ग्रहण)। तब ये धरती के बाहरी साये से गुजर रहा था जिससे सूक्ष्म खंडच्छायायुक्त चंद्र ग्रहण हुआ था। इसे स्ट्रॉबेरी मून ग्रहण कहते है। एक्सपीडिशन ६३ के कर्मी दल हेन्नेके वैटरिंग ने यह तस्वीर ली थी ,जब स्पेस स्टेशन अंगोला के समुद्री तट से कुछ दुरी से अटलांटिक समुन्दर के ऊपर से गुजर रहा था ।

2. स्ट्रॉबेरी मून ग्रहण :
   

जून ९, २०२० को स्पेन और पुर्तगाल के आंतरराष्ट्रीय सीमा के पास Ponte da Ajuda नामक एक ऐतिहासिक पुल से स्ट्रॉबेरी मून ग्रहण (खंडच्छायायुक्त चंद्र ग्रहण ) की बेहद लुभावनी तस्वीर ली गई है। खगोल के सम्बंधित घटनाओं के फोटो लेनेवाले Sérgio Conceição सेरगिओ कंसिकाओ ने इस चंद्र ग्रहण की अलग अलग तस्वीरों का कोलाज बनाया।



3. सर्पिल आकाशगंगाएँ :

मई १८, २०२० को दो सर्पिल आकाशगंगाएँ, जिनका सामूहिक नाम Arp 271 है, एक दूसरे के इतने करीब आयी के ऐसा लगता था मानो एक दूसरे से टकराएगी। 

यह परस्पर प्रभाव डालने वाली आकाशगंगाएँ NGC 5426 और NGC 5427 अपने बीचमे एक पुल का निर्माण कर रही है जिसमे नए सूरज का निर्माण होने जा रहा है।
NGC 5426 और NGC 5427



यूरोपियन साउथर्न ऑब्जर्वेटरी के मुताबिक अगर यह


आकाशगंगाएँ आपसमे जुड़ने के बजाय टकरा गयी तो 

इनसे नए तारों के निर्माण की बड़ी लहर बनेगी, जिसे  

कुछ लाखो साल लगेंगे।   









४.  एबल २३८४ में गांगेय पुल का निर्माण : 

मई १४, २०२० को ली गयी इस तस्वीर में दिखे दो आकाशगंगा का समूह, जिसका सामूहिक नाम रखा है एबल २३८४, माना जाता है के दस करोड़ साल पहले एक दूसरेसे टकराये थे जिससे समूह में गरम वायु के पुल का निर्माण हुआ था जो तीस लाख प्रकाश-वर्ष जितना लम्बा फैला था। अभी की ली हुई नयी समग्र तस्वीर बताती है के इन आकाशगंगा समूहों में से एक के केंद्र में, गुप्त सुपरमैसिव ब्लैक होल ऊर्जावान कणों के एक शक्तिशाली जेट के साथ विस्फोट करके इस गांगेय पुल का आकार ले रहा है । 

इस चित्र में यूरोपके XMM - न्यूटन टेलिस्कोप और नासा के चंद्र X RAY ऑब्जर्वेटरी दोनों के X RAY डेटा को जोड़ दिया है (नील रंग में ) साथ ही भारत के Giant Metrewave Radio Telescope के रेडियो अवलोकन को (गुलाबी रंग में) और डिजीटल स्काई सर्वे का ऑप्टिकल डेटा (पिले रंग में) साथ दिखाया गया है।

५. जाड़े की अजब जमीन :

मई १२, २०२० को नासा द्वारा ली गयी तस्वीर में ऐसा प्रतीत होता है के मानो मंगल गृह की सदियों पुराने बर्फ की जमी हुई नदी हो।  मगर यह हमारी पृथ्वी की ली हुई तस्वीर है। यह लहराता जलमार्ग दरअसल यूक्रेन की २२०० किलोमीटर लम्बी नीपर (Dnieper) नदी है जो यूरोप की चौथी लम्बी नदी है। 

नासा के टेरा सेटेलाइट ने यूक्रेन के ऑस्टर शहर के करीब से गुजरती इस नदी की तस्वीर अपने Advanced Spaceborne Thermal Emission and Reflection Radiometer (ASTER) के माध्यम से ली। यह हमारी पृथ्वी के बदलते सतह को दर्शाती है।

६. दो भुजा वाली आकाशगंगा :

मई ८, २०२० को हबल स्पेस टेलिस्कोप द्वारा उपेक्षित  
सर्पिल गैलेक्सी NGC 3583 हमारी धरती से ९८० लाख  प्रकाश-वर्ष दूर, उर्सा मेजर नक्षत्र में स्थित है। जो हमारी आकाशगंगा के तीन-चौथाई जितनी बड़ी है। 

मगर हमारी आकाशगंगा की चार भुजा के बजाय NGC 3583 की दो भुजाये है जो बाहर की और खुलती है  जब  की हमारी चारो भुजाये अंदर की और मुड़ती है।  

खगोल वैज्ञानिको ने इसमें दो सुपर नोवा विस्फोट को देखा था, एक १९७५ में तो दूसरा २०१५ में।  

७. मकड़ी के आकार का इलाका : 

यह अप्रैल ३०, २०२० को Mars Reconnaissance Orbiter ने High-Resolution Imaging Science Experiment द्वारा ली गयी यह मंगल गृह के सतह की तस्वीर है।

यह मकड़ी के आकार वाली भू-आकृतिया दिखती है इसलिए वैज्ञानिको ने araneiform याने मकड़ी के आकार का इलाका नाम दिया।  


मंगल गृह पर जाड़े में इतनी ठण्ड होती है के हवामे मौजूद कार्बन डायोक्साइड जम जाता है और बर्फ बनकर जमीन पर जमा हो जाता है। जब बर्फ वसंत रुत में पिघलती है तब कार्बन डायोक्साइड रिफाइन होकर हवा में घुल जाता है या यु कहिये घन से वायु में परिवर्तित हो जाता है। और जमीं पर गहरी द्रोणिका या नदी का क्षेत्र बन जाता है क्यूंकि सतह के निचे कुछ गैस दबी हुई रहती है। 




८. आकाशगंगा की कमान :        

अप्रैल २८, २०२० को ली हुई यह बेहद मनमोहक तस्वीर है हमारी आकाशगंगा की है। चिली के ला-सीला ऑब्जर्वेटरी के आकाश पर दिखती यह फोटो यूरोपियन साउथर्न ऑब्जर्वेटरी (ESO) के Petr Horálek नामक वैज्ञानिक ने ली है। 

इसके बिच में आप ESO का ३.६ मीटर बड़ा टेलिस्कोप दिखाई देता है और उसके बाये मे स्विस १.२ मीटर बड़ा लेओन्हार्ड यूलर टेलिस्कोप है । जिसके ऊपर ३६० डिग्री में दिखती आकाशगंगा के कमान है और दाहिने अंग के नीचे छोटे और बड़े मागेलैनिक बादल है, जो हमारी आकाशगंगा के उपग्रह आकाशगंगाएँ है।

इस कमान की बायीं ओर शनि गृह दिखाई देता है और उसके ऊपर, बायीं ओर चमकता हुआ बृहस्पति दिख रहा है।  


VILA
V वा
८७९६२१२०३२

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