Monday, June 8, 2020

इटली में कोरोना का हाहाकार





इटली का नाम सुनते ही कोरोना का नाम सामने आता है। दुनिया में अगर कोई देश सबसे बुरी तरह कोरोना की चपेट में आया है तो वो है इटली! जब की यहा की स्वास्थ सेवा दुनिया में सबसे बेहतर है। इसके बावजूद इटली की जो दुर्दशा हुई थी उसे देखते हमें चैन की साँस लेनी चाहिए के भारत में स्वास्थ सेवा इतनी बड़ी लोकसंख्या के लिए बहुत ही कम है, जिसे देख कर WHO ने पहले ही धोके की सुचना दी थी के भारत पर नजर रखनी होगी, महामारी के प्रभाव की अगर  बात करे तो इटली के मुकाबले हम बेहतर स्थिती मे थे |
आईये जानते है वो कौन कौन सी वजह जिसने इटली मे इतनी भारी तबाही मचा दी

. बुजुर्गो की बड़ी तादात :
इटली दुनिया में लम्बी आयु वाला छठा देश है जहा जनता की औसतम आयु ८४ है। २०१८ में २२.% जनता ६५ साल उम्र की या उसके ऊपर की थी  पुरे यूरोप में यह सबसे बड़ा आकड़ा है।
चिकित्सा वैज्ञानिक के अनुसार कोरोना महामारी आसानी से बुजुर्गो पर हावी होती है। जिसका बड़ा कारण है इनमे प्रतिकार शक्ति का कम होना। कोरोना हमारे श्वसन प्रक्रियापर आक्रमण करता है। और जिनके फेफड़े शराब और सिगरेट से पहले ही कमजोर होते है वह इस महामारी का बड़ी आसानी से शिकार होते है। यह भी एक वजह है इटली में इतनी बड़ी संख्या में लोगों की मौते हुई।
इटली में निवृति के लिए ६७ साल तय किया गया है जो पश्चिमी प्रगत देशो में औसतन आयुमर्यादा से दो साल ज्यादा है! इसलिए कई लोग जब संक्रमण जोर पकड़ रहा था, काम पर मौजूद थे बजाय घर में।

. करीबी निकटता : 
यहाँ के लोग सोशल डिस्टेंसिंग जैसी बातो को बिलकुल मानते नहीं। किसीसे मिलते वक्त गले लगना, गाल पे पप्पी देना पुरे पश्चिमी देशो मे आवभगत की प्रथा है  फिर वोह रिश्तेदार हो, दोस्त हो, सहेली हो या काम की जगह पर का साथी हो, चाहे कोई भी अनजान व्यक्ति- खास करके स्त्री ही क्यों न हो, यह प्रथा यूरोप अमेरिका से फैलकर विश्व में कई देशो में अपनाई गयी है।

कोरोना का संक्रमण इतना खतरनाक है के दो इंसानो के बीच एक-दो मीटर की दुरी भी कम है, तो आप सोच सकते हो की इन पश्चिमी देशो मे कितनी तेजी से यह संक्रमण फैला होगा। किसी इंसान के साथ की करीबी उनके संस्कृति का हिस्सा है।
देश के पंतप्रधान ने मार्च २०२० में बड़े पैमाने में लोगो का मिलना, मीटिंग रखना आदी पर पाबन्दी डाली मगर तब तक काफी देर हुई थी।

यहाँ एक और बात थी जीवन शैली की। देश के दक्षिणी इटली के गाओ में अधिकतम जवान लोग अपने बुढे माँ-बाप और दादा-दादी के साथ रहते है और काम के लिए उत्तरी इटली के घने आबादी वाले शहरो में जाते है। कुछ विशेषज्ञों के अनुसार इसी आने जाने से इस बीमारी को फैलने में काफी मदत मिली। शहरो में सोशल लाइफ जीने की, लोगो से घुल-मिलने की आदत से यह लोग इस कोरोना के वाहक बने और यह बीमारी मध्य और दक्षिण इटली में भी फैलती गयी।
खुले विचारो वाले विवाह - बाह्य शारीरिक संबंध रखना आम बात समजते है, और क्या चाहिये महामारी को फैलने के लिये?

. घनी आबादी :
इटली एक घनी आबादी का देश है। पुरे देश में एक स्क्वेयर माइल में (२.५९ स्क्वेयर किलोमीटर) ५३३ जितनी घनी आबादी है। २०१८ में इटली की जनसँख्या ६.०५ करोड़ थी जबकि कुल जमीन ३,०१,३३८ किलोमीटर वर्ग है। 

जर्मनी में घनी आबादी का आकड़ा २३५ है तो अमेरिका में सिर्फ ९४ ! जब की भारत में, इटली के मुकाबले  आकड़ा मात्र ४१९ है ! अब आप अंदाजा लगा सकते है की इस देश में लोगों की आबादी कितनी घनी है और लोग एक-दूसरे के कितने करीब रहते है।   
दो-तिहाई लोग शहरो में रहते है जहा आबादी और भी घनी है।  मिलान शहर में यह आकड़ा १९००० जितना है तो रोम में ५८०० ! देश छोटा होने से और आबादी घनी होने से वहा कोरोना का विस्फ़ोट हुआ  

. उत्तरी इटली बिजनेस हब बना : 
मिलान इटली की आर्थिक राजधानी है जो उत्तर में है। उसके चीन से व्यापारी और शैक्षणिक सम्बन्ध घने है। उत्तरी इटली के कई इलाकों में बड़ी-बड़ी आंतर-राष्ट्रीय कम्पनिया है। पूरी दुनिया से लोग यहाँ मीटिंग और सम्मलेन के लिए आते है। एक संक्रमित व्यक्ति सिर्फ आसपास के लोगों को संक्रमणीत कर सकता है बल्कि यह संक्रमण पुरे देश में आसानी से और तेजीसे फ़ैल सकता है और ऐसा ही हुआ। जिसकी वजह ऊपर बताये हुए कारण थे।

. व्यापक रूप में संक्रमण :    
 २५ मार्च को इस महामारी की जकड में आने वाले देशो मे चीन पहिले क्रमांक पर था तो इटली दूसरे क्रमांक पर।  मगर चीन के मुकाबले जनसँख्या कम होकर भी यहा संक्रमण दर चीन के मुकाबले कई गुना ज्यादा था। किसी देश में आपातकालीन परिस्थिति में महत्वपूर्ण कारण का अवलोकन तभी किया जा सकता है जब आप दुसरो से सबक लो। मगर इटली में ऐसे हालात नहीं थे। चीनी विशेषज्ञ इटली आये मगर तब तक महामारी पूरी तरह से फ़ैल गयी थी, जिसके चलते चीन कुछ भी नहीं कर पाया।  
इटली सरकार ने इस बीमारी से जूंझने के लिए धीरे धीरे कदम उठाये, जैसे पूरी तरह से देश भर में मार्च २० से लोकडाउन लागू किया

इस अभूतपूर्व महामारी के साथ इटली की जंग जारी रही। देश की आबादी, व्यापार, संस्कृति और भूगोल, यह बाते महामारी के विस्फोट के लिए अनुकूल परिस्थिति थी।
हालात बडे ही भयानक और डरावने थे!
अस्पताल मरीजों से, लाशो से भरे थे। बुजुर्गो को बचाने के बजाय नौजवानो को बचाने को प्रमुखता दी गयी थी 🙄
कितना भयावह निर्णय था!

इस महामारी के संक्रमण की गति को इटली भाप नहीं पाया।

इटालियन नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ हेल्थ के डिपार्टमेंट ऑफ़
इंफेक्शियस डिसीज के अनुसंधानकर्ता फ्लाविआ रिकार्डो
कहते है : इस महामारी का संक्रमण हमारे ध्यान में आने से
काफी समय पहले सुरु हुआ थाऔर जब यह संक्रमण
अपनी चरम सीमा पर था तब हम अनजाने में एक दूसरे को  कोरोना तोहफे में दे रहे थे!
इसकी सुरुवात में, उत्तरी इटली के कोडोगनो के अस्पताल में
निमोनिया के असंख्य मामले दर्ज हुए।हो सकता है के उनका सामान्य वायरस फ्लू के लक्षण तहत
इलाज चल रहा था, क्यूँकी कोरोना महामारी से वो बिलकुल अंजान थे!
याने सही दवाई नहीं दी जा रही थी, क्यूंकि सारे आनेवाले संकट से अंजान थे !
यही से इस संक्रमण ने रफ़्तार पकड़ी होगीउन्होंने आगे   कहा| और लोगोने अपनी करीबी की संस्कृति भी नहीं छोड़ी। करिबी में एकता यह नारा जैसे देश में लगा हो!

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