विश्व के सभी देश कोरोना जैसी महामारी की वैक्सीन बनाने में जुट गए है, एक ऐसी महामारी जिसका स्वरुप भी इतना उलझा हुआ है के सभी उस से सम्भ्रमित हुए है।
जिससे उसकी टिका का अविष्कार करने में बड़ी कठिनाई आ रही है।
जैसा कि वैज्ञानिकों और चिकित्सा विशेषज्ञों ने वैक्सीन विकसित करने के लिए काफी तेज गति से काम करना जारी रखा है, ताजा रिपोर्ट बताते है कि इस महामारी का मुकाबला करने के लिए तक़रीबन 100 से अधिक संभावित टिकोंका संशोधन विभिन्न चरणों में चल रहा हैं।
ब्रिटिश अमेरिकन टोबैको :
ब्रिटेन के सबसे बड़े सिगारेट निर्माता, ब्रिटिश अमेरिकन टोबैको (BAT) और भारत के पतंजलि समूह जैसे नयी इकाइयां, जिनका मूल व्यवसाय अलग था, कोविड-१९ के टिके के उत्पादन की दौड़ में लगे रहे है ।
इस महामारी के लिए संभावित टीका के परीक्षण के रूप में दुनिया भर की प्रयोगशालाओं में प्रयास जारी हैं।
आईये एक नजर डालते है उन सभी कंपनी और संस्था पर जो टिका बनाने की होड़ में लगे है :
अमेरिका की मॉडेर्ना INC:
अमेरिका में स्थापित मोडेर्ना INC ने पहले ही क्लिनिकल परीक्षण के अपने प्रथम चरण को सफलता पूर्वक समाप्त कर दिया है, जिसके चलते इस महामारी के टिके के निर्माण में वो विश्व में सबसे आगे है ।
आधारित वैक्सीन विकसित कर रही है और अब वह दूसरे चरण में ६०० स्वस्थ व्यक्तियों पर अपने क्लिनिकल परीक्षणों के लिए तैयार है।
mRNA-१२७३ नामक टिका पहले से ही वायरस के खिलाफ सुरक्षात्मक एंटीबॉडी विकसित करने में सकारात्मक नतीजे दिखा चुकी है।
उन्होंने मार्च महीने में ५६ साल से उपर ४० ज्येष्ठ नागरिक /प्रतिभागियों पर इस वॅक्सीन का परिक्षण किया गया।
४० मरीजों में से ८ मरीजो पर, एक छोटे पैमाने पर, इस टिके का परिक्षण किया गया जो सफल हुआ !
सभी ४० प्रतिभागियों को वैक्सीन की २५ से २५० (mcg ) खुराक दी गई, जबकि ८ मरीज, जिनमे सुरक्षात्मक एंटीबॉडी विकसित हुई उनको इस टीका के २५ और १०० एमसीजी खुराक इंजेक्शन के जरिये दिए गए।
मॉडेर्ना टिका के साइड इफेक्ट:
शुरुआत में, सुई लगाने की जगह का ठंड पड़ना, दर्द होना, सूजन और चमड़ी का लाल होना आदि लक्षण पाए गए थे, जबकि एक मरीज पर इस मॉडर्न वैक्सीन का काफी गंभीर असर दिखाई दिया ।
एक नामी मीडिया के एक रिपोर्ट के अनुसार, इस २९ वर्षीय व्यक्ति को १०३ डिग्री बुखार, मतली/उबकाई और मांस पेशियों में दर्द जैसे असर दिखाई पड़े।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि भले ही वह बीमार थे, मगर यह दुष्प्रभाव या साइड इफेक्ट जान-लेवा नहीं था।
इस बात का ख्याल रखा गया के उस व्यक्ति को वैक्सीन की सर्वोत्तम खुराक दी गई।
सिनोवाक बायोटेक :
सबसे नए खोजो में टिके के उत्पादन में लगे एक चीनी दवा निर्माता सिनोवाक ने दावा किया है के उनकी कोविड-१९ के लिए विकसीत हो रही वेक्सीन ९९ प्रतिशत इस महामारी पर असर करेगी, क्यूंकि उनकी यह वेक्सीन नवीनतम विकास में, मानव उपयोग के लिए टीके के उत्पादन की दौड़ में सबसे आगे चलने वालों में से एक है।
चीनी दवा निर्माता ने कथित तौर पर कहा है कि उसे ९९ प्रतिशत यकीन है कि उनका टीका काम करेगा। इनका टीका कोरोनावैक (CoronaVac) अपने क्लिनिकल परीक्षणों में बंदरों में संक्रमण को रोकने के लिए प्रभावी साबित हुआ।

पतंजलि समूह :
इलाज विकसित करने के सबसे मजबूत दावेदारों में से एक के रूप में जाना जाता है।
CanSino एक वैक्सीन विकसित करने पर काम कर रहा है, जिसका नाम
Adenovirus Type 5 Vector है जो एक सामान्य कोल्ड वायरस में आनुवंशिक रूप से बदलाव करता है, जो मानव कोशिकाओं में प्रवेश करने के बाद प्रोटीन की संरचना को सुधारने का काम करता है।
Ad5-nCoV वैक्सीन अप्रैल के महीने में क्लिनिकल परीक्षणों के प्रथम चरण में हैं, जहां १८ से ६० आयु वर्ग के १०८ लोगो को इस प्रायोगिक वैक्सीन का इंजेक्शन लगाया गया था। मेडिकल जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, लैंसेट ने दिखाया कि CanSino Biologics Inc द्वारा विकसित किये जा रहा टीका, टी-कोशिकाओं (T -Cell ) का निर्माण करके शरीर की प्रतिरक्षा (Defense) बढ़ाने में मदद कर सकता है और आमतौर पर उपयोग करने के लिए सुरक्षित भी है।
इन क्लिनिकल परिक्षण का पहला चरण, अप्रैल में १,००० से अधिक मरीजो पर किया जा चुका है और अगले चरण में ChAdOx1 nCoV-१९ या दूसरे नियंत्रण समूह लाइसेंस प्राप्त MenACWY नामक वैक्सीन को लगाना होगा, ताकि इस वैक्सीन की प्रभावशीलता और सुरक्षा समझ में आये।
नोवावेक्स कोविड १९ टिका:
अमेरिका स्थित ड्रग बनाने वाली कंपनी के इस वैक्सीन उम्मीदवार ने ऑस्ट्रेलिया में पहिले और दूसरे चरण का परीक्षण शुरू कर दिया है। मानव परीक्षण ऑस्ट्रेलिया के नोवाक्स वैक्सीन उम्मीदवार NVX-CoV2373 के १३० स्वयंसेवकों पर किया जाएगा।
संभावित वैक्सीन उम्मीदवार को जेनेटिक इंजीनियरिंग द्वारा विकसित किया जा रहा है। इसमें SARS-COV-2 वायरस के आनुवांशिक अनुक्रम का उपयोग किया गया, जिसने बबून और चूहों पर किये गए परिक्षण में बड़ी सफलता प्राप्त की है।
सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया :
इसके अलावा, अमेरिका की इस ड्रग बनाने वाली कंपनी ने भारत के पुणे में सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया नामक एक बडासा प्लांट याने कारखाना खरीदा है, जो दुनिया का सबसे बड़ा टीका निर्माता है। इस जैव प्रौद्योगिकी फर्म (Biotechnology
firm) का लक्ष्य साल भरमे कोविड-१९ वैक्सीन उम्मीदवार की एक अरब खुराक का उत्पादन करना है।
सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया
इनोवियो फार्मास्यूटिकल्स :
इनोवियो फार्मास्यूटिकल्स पहले ही अपने टीके के उम्मीदवार INO-४८३ वैक्सीन की प्रभावकारिता और सुरक्षा का परीक्षण करने के लिए अपने क्लिनिकल परीक्षणों के प्रथम चरण का आयोजन कर चुका है।
जिसके परिणाम जून २०२० के अंत तक जाहिर होने की उम्मीद है । जिसके लिए ४० स्वस्थ स्वयंसेवकोंको चार सप्ताह के अंतराल में इसके प्रायोगिक टीके की दो खुराक दी गई थी। प्रारंभिक आकड़े प्रकाशित होने के बाद, इनोवियो दूसरे तथा तीसरे चरण के परीक्षण के साथ आगे बढ़ने के लिए अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन की मंजूरी लेगा।
सबसे प्रभावी और सुरक्षित संभावित वैक्सीन का पता लगाने के लिए प्रतिभागियों पर चार आरएनए-आधारित टीकों का परीक्षण किया जा रहा है।
ग्लैक्सो स्मिथक्लाइन पीएलसी (GSK PLC) और सनोफी टीका :
https://www.google.com/amp/s/www.cnbctv18.com/healthcare/sanofi-gsk-to-supply-up-to-60-million-doses-of-covid-19-vaccine-to-uk-6480801.htm/amp
कोरोनो वायरस से लड़ने के लिए एक वैक्सीन विकसित करने के इरादे से एक फ्रांसीसी दवा निर्माता सनोफी ने यूनाइटेड किंगडम के प्रतिद्वंद्वी ग्लैक्सो स्मिथक्लाइन PLC के साथ भागीदारी की है। इस वैक्सीन का प्रयोग एक मौजूदा तकनीक पर आधारित है जिसका उपयोग इन्फ्लूएंजा के लिए किया गया था और २०२० की दूसरी छमाही में क्लिनिकल परीक्षणों में प्रवेश करने के लिए तैयार है।
GSK वैक्सीन के सहायक घटक के विकास पर काम करेगा, जबकि सनोफी प्रतिजन के उत्पादन पर काम करेगा जो कोरोना वायरस के स्पाइक प्रोटीन को लक्षित करेंगे।
भारत के टिका बनाने वाली कंपनी:
भारत में, ३० से अधिक वैक्सीन उत्पादक उम्मीदवार कोरोना वायरस से लड़ने के लिए काम कर रहे है और उनका काम विभिन्न चरणों में चल रहा हैं।
प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के. विजयराघवन के अनुसार, "भारत में लगभग ३० समूह, व्यक्तिगत शैक्षणिक संस्था कोविड-१९
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से लड़ने के लिए टीके विकसित करने की कोशिश कर रहे हैं, और इनमे २० संस्थाए अच्छे प्रगति पथ पर हैं।" प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के. विजयराघवन
इसके अतिरिक्त, Mynvax जो एक भारतीय चिकित्सा दवा बनाने वाली नयी संस्था है, कोरोना वायरस को रोकने के लिए एक प्रोटीन-आधारित वैक्सीन विकसित करने पर काम कर रही है।
कंपनी १८ महीनों में वैक्सीन को बाजार में उतारने की उम्मीद कर रही है।
ICMR-Bharat Biotech Vaccine:
भारतीय वैक्सीन निर्माता भारत बायोटेक ने कोरोना वायरस के लिए वैक्सीन विकसित करने के लिए थॉमस जेफरसन यूनिवर्सिटी ऑफ फिलाडेल्फिया के साथ करार किया है। थॉमस जेफरसन विश्वविद्यालय ने वैक्सीन की खोज के लिए निष्क्रिय रेबीज वैक्सीन को कोरोना वायरस प्रोटीन बनाने के लिए इस्तेमाल किया है।
सन फार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज लिमिटेड भी कोरोनो वायरस के लिए एक संभावित टीका विकसित करने की इस दौड़ में शामिल हो गयी है। भारतीय दवा निर्माता को कोविड-१९ रोगी पर एक अग्नाशयशोथ दवा,(Pancreatitis
drug ) नाफामोस्टेट (खून में बनने वाले थक्कों को रोकने वाला) की क्लिनिकल परीक्षण शुरू करने के लिए भारतीय नियामक से सभी अनिवार्य अनुमोदन प्राप्त हुए हैं।
इस दवा की पहचान जर्मनी के टोक्यो विश्वविद्यालय और लीबनिज इंस्टीट्यूट फॉर प्राइमेट रिसर्च के वैज्ञानिकों द्वारा कोरोनो वायरस के संभावित इलाज के रूप में की गई है। फ़िलहाल, कोरोनो वायरस रोगी पर नाफामोस्टेट का परीक्षण करने के लिए दुनिया भर में तीन परीक्षण चल रहे हैं और प्रारंभिक परिणाम काफी आशाजनक है।
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3 comments:
अच्छी जानकारी।
अच्छी जानकारी।
chan
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