गिरनार का गहरा जंगल, पूनम की रात । उंचे उंचे पेड मानो एक दूसरे से उंचाइ छूने की स्पर्धा कर रहे हों। सारे जानवर नींद के आगोश मे थे। ठंडी हवाये जंगल से तेज गुजरती हुई ठंड बढा रहीं थीं।
कही जुगनुअों की आवाज तो कही उल्लु अौर चमकादढ का शोर, घने अौर उंचे पेडों की वजह से चांदनी यहाँ -वहाँ बिखरी हुयी थी।
दूर एक टीला , पेड पौधे अौर घास से भरा हुआ था, उस पर कई छोटे-मोटे जानवर गहरी नींद मे सोये थे ।
तभी दूर कही पेड-पत्तो मे खडखडाहट होती है, मानो कोई दबे पैर चला आ रहा हो अौर एकाएक उन झाड़ियोंमे से एक शेरनी झांकती हुई नजर आती है।
शेरनी को गंध आती है उन हिरनों की जो कुछ ५०० मीटर की दूरी पर उस टीले पर गहरी नींद मे सोये थे। शेरनी धीरे धीरे, दबे पैर, उनके करीब जाती है। उसी वक्त पेडो पर सोते हुअे बंदर जाग जाते है अौर सारे जोर जोर से चीखने लगते है। हिरनों का झुंड चौकन्ना होकर उठ के भागने लगता है । तुरंत शेरनी भी अपनी सारी ताकत लगाकर जोरोसे दौडती है आैर हिरन की टोली का पीछा करती है। अचानक उसकी नजर एक मादा हिरन पर पड़ती है जो गर्भवती होती है।जिसकी वजहसे वह हिरनी उतनी तेज नही दौड पाती है. शेरनी इस बातको भाप जाती है आैर फिर जोर लगाकर तेज़ दौडती है। कुछ देर जिंदगी अौर मौत का खेल चलता है। मगर कब तक !!! शेरनी एक छलांग लगाकर हिरनी पर झपटती है अौर उसकी गर्दन दबोचती है। हिरनी काफी छटपटाती है अौर दम तोड़ देती है । 😔 मगर कुदरत का खेल देखो, मरते मरते हिरनी अपने बच्चे को जनम देती है। बच्चा पैदा होते ही दुध ढुंडता है। उसे भूख लगी होती है ।
शेरनी बच्चे को घूरती है, बच्चा आवाज लगाता है, शेरनी उलझी हुयी सी थोड़ी देर बच्चे को देखती है । कुछ देर बाद अचानक ही शेरनी उस बच्चे को चांटने लगती है. उसे पुरी तरह से साफ़ करती है ।
अौर . . . . अगले ही पल वह जमीन पर लेट जाती है अौर हिरन के बच्चे को अपने पेंट के पास लाती है। हिरन का बच्चा उसे अपनी ही माँ समझकर दूध पीने लगता है ।
दोस्तो ! अगर एक जानवर अपनी जरुरत पूरी होने पर भी, उस पर आनेवाली जिम्मेदारी निभा सकता है तो हम तो इंसान है ना?
७० साल पहले हमारी आज़ादी की जरुरत पूरी हुइ , मगर देश के प्रति हमारी जिम्मेदारी का क्या? वो शेरनी जो हिरनका भक्ष करती है अौर जरुरत पूरी होनेपर, नयी जिम्मेदारी का अहसास करती है । हम तो सबसे बुद्धिवान प्रजाति हैं , फिर भी देश के प्रति जिम्मेदारी कहाँ निभाते है। कुछ भ्रष्ट लोग हमे लूट रहे है।
१५००० करोड की संपत्ती लुट गयी है,एैसा मा.राम जेठमलानीजी कहते है । अौर हम अभी भी जात-पाँत के नाम पर दंगा करते है। 😞
कब रुकेगा यह सिलसिला ? बच्चा तो शेरनी का था ही नही, मगर देश तो अपना है !! हम ही कहेंगे भारत तेरे टुकड़े होंगे इंशा अल्ला😈😈😈😈😈
हमे ही भारतमाता की जय कहने मे शर्म आती है अौर कहेंगे आप जबरदस्ती ना करे???? जबरदस्ती तो ऐसे लोगों से करनी चाहिये। समुंदर पास ही है। गणेश जी , दुर्गा माता की मूर्तियां नही , ऐसे देश के दुश्मनों का विसर्जन करना चाहीये ।
हम आजा़द हुए, पर आजा़दी की जिम्मेदारी कब समझेंगे? क्यूँ हमसे छोटे देश हमसे ज्यादा तरक्की करते है, क्युंकी वे लोग हमारी तरह धर्म, जातीय दंगे अौर आरक्षण जैसी बातो मे उलझे नही हैं । जापान मे सूनामी आयी थी. जो इतनी भयानक थी, कि अगर हमारा देश होता तो अब भी सवर नही पाता । हम जिन बातो मे उलझे है अौर झगड़ते है उसे देखकर बाकी देश के लोग हम पर हँसते है। हमारी संस्कृति का महत्व वे समझते है पर हम भूल गय़े है ।
यही करते आये हैं ये नेता लोग इतने दशक से ।
पन्द्रहवीं सदीमे हमारे देश मे एक भी भिकारी नही था, ये एक ब्रिटीश ने संशोधन करके लिखा है । लोगो मे तब भी एकजुटता नही थी। मगर हम पर अंग्रेजों का, उनकी भाषा, संस्कृति का ऐसा भूत सवार था, कि हमे अपनी संस्कृति फीकी लगती थी। इसी बात का फायदा उठाकर ब्रिटिशो ने हम पर इतने साल राज किया। हमे लूटा, आर्थिक, शारिरीक अौर सांस्कृतिक तरीके से।
जागो भारतीय जागो ! जानवरों से जिम्मेदारी सीखो , वर्ना फिर गुलाम हो जाअो !! 😔😔😔


No comments:
Post a Comment