Saturday, August 24, 2019

जागृति (हिंदी कविता)



अब ना तू रुक हिंदू
अब ना तू झुक हिंदू
रोकना तेरी लुट हिंदू
लाना नयी ऋत हिंदू ||


लाना अत्याचार पर बिंदू
न सोचना अब परंतू-किंतू
बिखरोंको अब साथ गीन तू
पर अब लाना नयी ऋत हिंदू ||1||


शेरदिल तू चल जमाना है साथमे
मेरा हाथ थामकर चल अपने हाथमे
खोयी हुई मंजिल पाना एक दिन तू
तभी तो तू लायेगा नयी ऋत हिंदू ||2||


बदलाव ही जीवन है अब जान ये हीत तू
और बनाले खुदी को अपना मनमीत तू
कारवाँ बनता जायेगा बदल ये सीन तू
सिर्फ तभी तो तू लायेगा नयी ऋत हिंदू ||3||



वि वा
८७९६२१२०३२




















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