बुझाकर हजारो घरों का चिराग
वो कहता रहा शहर मे बीजली मुफ्त हैं l
जीवन में कुछ भी मुफ्त नहीं मिलता | कोई न कोई उसकी कीमत चुकाता है, जो आगे चलकर, सरकार समाज से वसूल करती है |
नोबल पुरस्कार प्राप्त, मशहूर अर्थशास्त्री श्री मिल्टन फ्रेडमन ने अपनी एक किताब का शीर्षक लिखा है THERE IS NO SUCH THING AS A FREE LUNCH, जो दरअसल एक संकल्पना है जो विश्वमे काफी प्रख्यात है, और वो यह कहती है के हर किसीको हर चीज या हर सेवा का मूल्य टेक्स के रूपमे देना पड़ता है, फिर चाहे वह आज दे, कल दे या परसो|
ऐसा नहीं के हमेशा अमिर आदमी ही पैसे देता है| अक्सर गरीब इन 'भेट वस्तु' का मोल चुकाता है, क्यूंकि सरकार माचिस की तीली से लेकर हिरे तक सभी चीजों पर टेक्स वसूल करती है जिसका सीधा मतलब है अगर यह मुफ्त का बोजा न होता तो सरकार कुछ चीजों पर से टेक्स हटाती|
मुफ्त लंगर का मेनू :
दिल्ली की राज्य सरकार आम आदमी पक्ष के तहत दो कार्यकाल चली |आम तौर पर वादे पुरे करने का समय होता है अगला चुनाव का करीब आना और फिर कुछ बड़े काम हाथ में लेकर उसे न सिर्फ पूरा करना पर जोर शोर से उसकी जाहिरात करना|
दिल्लीके मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने, कैसे खुद को सत्ता में रखना है इसका गणित सिख लिया |
नोबल पुरस्कार प्राप्त, मशहूर अर्थशास्त्री श्री मिल्टन फ्रेडमन ने अपनी एक किताब का शीर्षक लिखा है THERE IS NO SUCH THING AS A FREE LUNCH, जो दरअसल एक संकल्पना है जो विश्वमे काफी प्रख्यात है, और वो यह कहती है के हर किसीको हर चीज या हर सेवा का मूल्य टेक्स के रूपमे देना पड़ता है, फिर चाहे वह आज दे, कल दे या परसो|
ऐसा नहीं के हमेशा अमिर आदमी ही पैसे देता है| अक्सर गरीब इन 'भेट वस्तु' का मोल चुकाता है, क्यूंकि सरकार माचिस की तीली से लेकर हिरे तक सभी चीजों पर टेक्स वसूल करती है जिसका सीधा मतलब है अगर यह मुफ्त का बोजा न होता तो सरकार कुछ चीजों पर से टेक्स हटाती|
मुफ्त लंगर का मेनू :
दिल्ली की राज्य सरकार आम आदमी पक्ष के तहत दो कार्यकाल चली |आम तौर पर वादे पुरे करने का समय होता है अगला चुनाव का करीब आना और फिर कुछ बड़े काम हाथ में लेकर उसे न सिर्फ पूरा करना पर जोर शोर से उसकी जाहिरात करना|
दिल्लीके मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने, कैसे खुद को सत्ता में रखना है इसका गणित सिख लिया |
सदियों से भारत में मुस्लिम तुष्टिकरण की निति चलती आयी है। यही अरविन्द केजरीवाल ने भी किया, जो आम
आदमी के लिए इस आम आदमी पार्टी ने कबर खोदने जैसा काम किया।
उन्होंने, न सिर्फ कुछ काम मतदान आने से पहले पुरे किये, पर मुफ्त सेवा का जो खेल खेला है, वोह अपने स्वार्थ के लिए कितना था और लोगोंकी भलाई के लिए कितना था, इस बात को समझना बेहद जरूरी है:
केजरीवाल ने जो मुफ्त की योजनाए चलायी वो कुछ इस प्रकार की है :
१. औरतों के लिए बस तथा मेट्रो में मुफ्त सवारी;
२. २०० यूनिट तक मुफ्त बिजली और उससे अधिक बिजली बिलमे में सब्सिडी;
३. २०००० लीटर तक मुफ्त पानी;
४. गरीब बच्चो के लिए मुफ्त शालेय शिक्षण;
५. मुफ्त वायफाय;
६. बुजुर्ग याने सीनियर सिटीझन वालों के लिए मुफ्त तीर्थ-यात्रा;
७. पानी और गटर की सेवा उपलब्ध कराने के लिए जो डेवेलपमेंट चार्ज था उसे हटा दिया;
८. जगह जगह मोहल्ला क्लिनिक का निर्माण करके उसके तहत मुफ्त जाँच, मुफ्त दवाइया, मुफ्त इलाज और मुफ्त सर्जरी;
९. साथ ही आगजनी और रस्ते पर हुई दुर्घटना के शिकार लोगों के इलाजी-खर्चे सरकार उठाएगी;
बेहतर स्वस्थ और मुफ्त शिक्षा, अर्थशात्र में देश के लिए अच्छी मानी जाती है, क्यूंकि उसका लाभ न सिर्फ उस व्यक्ति को मिलता है, पर उसका सीधा और सकारात्मक असर समाज पर भी पड़ता है |
यह वो सेवाएं है जिसे देश का व्यापर मुहैया नहीं करा सकता, सरकार को राष्ट्रकोष से इसे मुहैया करना पड़ता है|
कुछ हद तक मुफ्त बिजली और मुफ्त पानी उपभोगता कानून के तहत सही है क्यूंकि बिजली और पानी सेवामे जो तकनिकी होती है उसमे कई बार चोरी होती है जिसे काबू में लाना मुश्किल होता है, इसीलिए यह मुफ्त सेवा कुछ हद तक इस नुकसान को बर्दाश्त करती है |
इस आम आदमी पार्टी याने 'आप' ने न तो टेक्स की सीमाएं बढ़ायी और न ही कोई ऋण लिया, जिससे ये सारी मुफ्त सेवाएं वो मुहैया करा सके| यह भी जन-तुष्टिकरण का एक हिस्सा है या यूँ कहे के यह भी मुफ्त की एक और सौगात है |
और इसका कारण था दिल्ली की स्वस्थ आर्थिक स्थिति, जो मुख्यमंत्री स्वर्गिय श्रीमती शिला दीक्षित की कुशल राजनीती से सम्भव हुई थी| केजरीवाल के लिए यह तैयार मंच था जिसका उसने खूब फायदा उठाया |
तो अरविन्द केजरीवाल ने क्या किया?
कंट्रोल एन्ड ऑडिटर जनरल, याने कैग के २०१३-२०१८ काल की पंच वार्षिक रिपोर्ट में लिखा था के दिल्ली की आर्थिक स्तिथि अब ऐसी है के किसी भी किसम के कर्जे का शहर पर बोज नहीं है, क्यूंकि शहर की Gross State Domestic Product याने जीएसडीपी, जन-कर्ज से तेजीसे आगे निकल गयी है | रिझर्व बैंक की फायनांस रिपोर्ट के मुताबिक, अगर दिल्ली इस साल रु.20142 करोड़ अतिरिक्त खर्चा करेगी, तो भी वित्तीय हानी नहीं होगी | शहर की कुल आय ने वित्तीय घाटे को समाप्त किया था|
मगर अब, यह राजस्व आय साल दर साल घटती जा रही है और वित्तीय घाटा बढ़ता जा रहा है|
दूसरे और आसान शब्दों में कहा जाय तो जो स्वस्थ आर्थिक स्तिथि श्रीमती शीला दीक्षित के कार्यकाल में बनी थी उसे ही अरविन्द केजरीवाल ने, खुद की प्रतिमा उज्वल करनेके लिए, लोगोमे मुफ्त में बाँट दी!
अब जानते है उन ७ वजह को जिनके कारण अरविन्द केजरीवाल लगातार तीसरी बार दिल्लीके मुख्यमंत्री बने और इस बार काफी बड़े मार्जिन से!
उन्होंने, न सिर्फ कुछ काम मतदान आने से पहले पुरे किये, पर मुफ्त सेवा का जो खेल खेला है, वोह अपने स्वार्थ के लिए कितना था और लोगोंकी भलाई के लिए कितना था, इस बात को समझना बेहद जरूरी है:
केजरीवाल ने जो मुफ्त की योजनाए चलायी वो कुछ इस प्रकार की है :
१. औरतों के लिए बस तथा मेट्रो में मुफ्त सवारी;
२. २०० यूनिट तक मुफ्त बिजली और उससे अधिक बिजली बिलमे में सब्सिडी;
३. २०००० लीटर तक मुफ्त पानी;
४. गरीब बच्चो के लिए मुफ्त शालेय शिक्षण;
५. मुफ्त वायफाय;
६. बुजुर्ग याने सीनियर सिटीझन वालों के लिए मुफ्त तीर्थ-यात्रा;
७. पानी और गटर की सेवा उपलब्ध कराने के लिए जो डेवेलपमेंट चार्ज था उसे हटा दिया;
८. जगह जगह मोहल्ला क्लिनिक का निर्माण करके उसके तहत मुफ्त जाँच, मुफ्त दवाइया, मुफ्त इलाज और मुफ्त सर्जरी;
९. साथ ही आगजनी और रस्ते पर हुई दुर्घटना के शिकार लोगों के इलाजी-खर्चे सरकार उठाएगी;
बेहतर स्वस्थ और मुफ्त शिक्षा, अर्थशात्र में देश के लिए अच्छी मानी जाती है, क्यूंकि उसका लाभ न सिर्फ उस व्यक्ति को मिलता है, पर उसका सीधा और सकारात्मक असर समाज पर भी पड़ता है |
यह वो सेवाएं है जिसे देश का व्यापर मुहैया नहीं करा सकता, सरकार को राष्ट्रकोष से इसे मुहैया करना पड़ता है|
कुछ हद तक मुफ्त बिजली और मुफ्त पानी उपभोगता कानून के तहत सही है क्यूंकि बिजली और पानी सेवामे जो तकनिकी होती है उसमे कई बार चोरी होती है जिसे काबू में लाना मुश्किल होता है, इसीलिए यह मुफ्त सेवा कुछ हद तक इस नुकसान को बर्दाश्त करती है |
इस आम आदमी पार्टी याने 'आप' ने न तो टेक्स की सीमाएं बढ़ायी और न ही कोई ऋण लिया, जिससे ये सारी मुफ्त सेवाएं वो मुहैया करा सके| यह भी जन-तुष्टिकरण का एक हिस्सा है या यूँ कहे के यह भी मुफ्त की एक और सौगात है |
और इसका कारण था दिल्ली की स्वस्थ आर्थिक स्थिति, जो मुख्यमंत्री स्वर्गिय श्रीमती शिला दीक्षित की कुशल राजनीती से सम्भव हुई थी| केजरीवाल के लिए यह तैयार मंच था जिसका उसने खूब फायदा उठाया |
तो अरविन्द केजरीवाल ने क्या किया?
कंट्रोल एन्ड ऑडिटर जनरल, याने कैग के २०१३-२०१८ काल की पंच वार्षिक रिपोर्ट में लिखा था के दिल्ली की आर्थिक स्तिथि अब ऐसी है के किसी भी किसम के कर्जे का शहर पर बोज नहीं है, क्यूंकि शहर की Gross State Domestic Product याने जीएसडीपी, जन-कर्ज से तेजीसे आगे निकल गयी है | रिझर्व बैंक की फायनांस रिपोर्ट के मुताबिक, अगर दिल्ली इस साल रु.20142 करोड़ अतिरिक्त खर्चा करेगी, तो भी वित्तीय हानी नहीं होगी | शहर की कुल आय ने वित्तीय घाटे को समाप्त किया था|
मगर अब, यह राजस्व आय साल दर साल घटती जा रही है और वित्तीय घाटा बढ़ता जा रहा है|
दूसरे और आसान शब्दों में कहा जाय तो जो स्वस्थ आर्थिक स्तिथि श्रीमती शीला दीक्षित के कार्यकाल में बनी थी उसे ही अरविन्द केजरीवाल ने, खुद की प्रतिमा उज्वल करनेके लिए, लोगोमे मुफ्त में बाँट दी!
अब जानते है उन ७ वजह को जिनके कारण अरविन्द केजरीवाल लगातार तीसरी बार दिल्लीके मुख्यमंत्री बने और इस बार काफी बड़े मार्जिन से!
अरविन्द केजरीवाल की ये मुफ़्त वाली चाल, कुछ यूँ कामयाब हुई के भ्रष्ट कांग्रेस को कही भी कोई सीट नहीं मिली| श्रीमती शिला दीक्षित जी का देहांत भी, कांग्रेस की इस शर्मनाक हार का वजह बनी|
पहिली वजह:
निजी स्कुल में फी पर नियंत्रण: यह एक बहुत बड़ा निर्णय था और यह केजरीवाल को तीसरी बार जिताने मे अहम् भूमिका निभा गया| शहरमे स्कुल जाने वाले बच्चोंकी संख्या बड़ी तादात में है, और केजरीवाल का फी पर अंकुश लाने का जो निर्णय था वह लोगो के जीवन पर सीधा असर कर गया |
पहिली वजह:
निजी स्कुल में फी पर नियंत्रण: यह एक बहुत बड़ा निर्णय था और यह केजरीवाल को तीसरी बार जिताने मे अहम् भूमिका निभा गया| शहरमे स्कुल जाने वाले बच्चोंकी संख्या बड़ी तादात में है, और केजरीवाल का फी पर अंकुश लाने का जो निर्णय था वह लोगो के जीवन पर सीधा असर कर गया |
अपने मुख्यमंत्री पद के दूसरे पांच साल के चरण मे, लोगो के दिल में प्रवेश करने के लिए केजरीवाल ने दिल्ली की करीब दोसो निजी स्कूले, जिन्हे सरकारी ग्रांट नहीं मिलती थी,अौर मनमानी तरीके से छात्रो की फ़ी बढ़ा रही थी, उन पर रोक लगा दी|
ये सारी स्कूले हाय कोर्ट तक गयी, पहले जजने इस पर पिछले मार्च २०१९ मे केजरीवाल के निर्णय को गैरक़ानूनी ठहराया, मगर बाद में डिविझन बेंच ने इस साल के बीच में, फी बढ़ाने पर रोक लगा दी और यह केजरीवाल के लिए एक बड़ी जीत साबित हुई|
केजरीवाल ने तीसरे चुनाव में इसी मुद्देको अपना प्रमुख हथियार बनाया, और घोषणा की के उसकी सरकार इसी तरह, आगे भी सारे स्कुलो पर मनमानी तरीके से फी बढ़ाने पर रोक लगाएगी|
ऐसा उन्होंने १९ जनवरी २०२० को १०.२०AM बजे ट्वीट किया :
"जब तक दिल्ली में मेरी ईमानदार सरकार है, अभिभावकों को चिंता करने की कोइ जरूरत नहीं है। दिल्ली के किसी भी प्राइवेट स्कूल को फीस की मनमानी नहीं करने देंगे। पिछले पांच सालों की तरह आगे भी हम फीस पर नियंत्रण रखेंगे।"
वो जानते थे की आज सोशल साईट का जमाना है, जिसमे बडों के अलावा बच्चे भी काफी एक्टिव होते है।
केजरीवाल यही पर नहीं रुके,अौर जिन स्कूलो ने दूसरे स्कूलों के मुकाबले ज्यादा फी ली थी, उन स्कुलों को ज्यादा फी लौटाने को मजबूर किया| तो इस तरह केजरीवाल बड़ी आसानी से लोगोमे मशहूर होते गए|
दूसरी वजह:
स्कुलोंका ढांचा बदला : सरकारी स्कूलों में केजरीवाल ने काफी बदलाव लाये, नए ढ़ाँचे मे ढाले| यही नहीं, शिक्षकों को अभिभावकों से सकारात्मक बातचीत करने के लिए प्रशिक्षण भी दिया | जिसमे उपमुख्य मंत्री और शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया का बड़ा योगदान रहा| ऐसा पार्टी प्रवक्ता का दावा है।
केजरीवाल ने कहा: "हमारी सरकारी स्कूले, निजी स्कूलों से कम नहीं है। पिछले साढ़े तीन सालमे, हमने दिल्लीके वार्षिक बजट का २५ फीसदी धन, शिक्षा के क्षेत्रमे लगाया है| पहले से तीन गुना ज्यादा पैसा हमने इस क्षेत्र में लगाया, और इसीलिए दुनिया की बेहतरीन स्कुलो मे दिल्ली की स्कूले शरीक हुई है | यहाँ बच्चोके लिए लायब्रेरी, स्विमिंग पुल, बेहतरीन लेबोरेटरी जैसी सुविधाये हमने दी |"
कइ दिल्लीवासी का कहना है के इन सरकारी स्कुलोमे सिर्फ रंग लगाकर नया दिखाने की कोशिश की है, इस चालबाजी को लोगोने भूलना नहीं चाहिए|
केजरीवाल ने यह भी दावा किया के कई अभिभावकोने अपने बच्चो को निजी स्कुल से निकलवा कर, सरकारी स्कुलो मे भर्ती कराया है | शिक्षकों को केम्ब्रिज, हारवर्ड और NIE सिंगापोर जैसी विदेशी यूनिवर्सिटी में प्रशिक्षण देनेका अवसर भी हमने दिया है।
साल २०१६ में, केजरीवाल ने शिक्षक-अभिभावक की मीटिंग (Parents Teacher Meeting) को अनिवार्य बनाया, जिसका आगे चलकर सभी बच्चोको फायदा हुआ|
तीसरी वजह :
मुफ्त बिजली और पानी: चुनाव के छह महीने पहिले, केजरीवाल ने बिजली मे सब्सिडी देना आरम्भ किया| २०० यूनिट तक शतप्रतिशत सब्सिडी, याने मुफ्त बिजली, २०१ से ४०० यूनिट तक ५० प्रतिशत सब्सिडी लागु कर दी| केजरीवाल ने कहा, "जहा पहले २०० यूनिट का बिल रु.६२२/- आता था अब शुन्य आता है और ढाईसौ यूनिट पर जहा पहले रु. ८००/- का बिल आता था वहा अब रु. २५२/- देने पड़ते है, तिनसों यूनिट के रु. ९७१/- के बदले रु.५२६/- और चारसो यूनिट के रु.१३२०/- के बजाय रु.१०५०/- देने पड़ते है|"
इसके अलावा पानी प्रति घर, प्रति महीना २०,००० लीटर तक मुफ्त देनेका वादा भी पूरा किया| जहा एक घर, दिन के रु.८५/- प्रति लीटर पानी पर खर्च कर रहा था, अब उसे मुफ्त में २०,००० लीटर पानी मिलने लगा|
चौथी वजह:
मोहल्ला क्लिनिक : लोगोंको बेहतरीन और मुफ्त इलाज प्रदान करने के लिए एक हजार मोहल्ला क्लिनिक बनाने का वादा किया, हालाकि हकिकत मे सिर्फ ३०१ ही बना पाये | आम बीमारियों का इलाज और २१२ मुफ्त टेस्ट का प्रावधान किया | इस मोहल्ला क्लिनिक की पूर्व यूएन सेक्रेटरी जनरल कोफ़ी अन्नान और WHO के पूर्व डिरेक्टर जनरल डॉ. ब्रंटलैंड ने काफी तारीफ की |
मगर इन ३०० में से अधिक तर क्लिनिक बदतर हालत में है| अौर कोइ गरिब भी वहा इलाज के लिये नही जाता।
पांचवी वजह:
महिलाओंके लिए फ्री बस और फ्री मेट्रो सेवा: केजरीवाल ने दिल्ली विधान सभाके चुनाव के तीन महीने पहले, याने ओक्टोबर २९ को दिल्ली की महिलाओं के लिए दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (डीटीसी) की पिंक रंगकी दस रुपये वाली टिकट पर महीने भर के लिए मुफ्त सफर का इंतेजाम किया। साथ ही मेट्रो का सफर भी मुफ्त रखा, जिसके लिए केजरीवाल ने रु २९० करोड़ का प्रावधान रखा |
छट्टी वजह:
हिंदुत्व धोरण: बीजेपी से बड़े पैमाने पर हिन्दू वर्ग छीनने के लिए केजरीवाल ने कुछ कदम उठाये| जैसे मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा के तहत वरिष्ठ नागरिको के लिए पांच धाम की मुफ्त रेल यात्रा प्रदान की जिसमे न सिर्फ यात्रा की तिकट, मगर रहना, खाना पीना आदि शामिल था| और इसके पश्चात् असेम्ब्ली मतदान के कुछ दिन पहिले, खुद को हनुमान भक्त साबित करने के लिए हनुमान चालीसा का पाठ भी पढ़ा| लेकिन शाहीन बाग में मुस्लिमों ने जो धरना लगाया है उसका खुलके समर्थन भी नहीं किया, ताकि हिन्दू नाराज न हो जाये, और न हीं विरोध किया|
सातवीं वजह:
छबि बदलाव: पहले केजरीवाल बीजेपी तथा मोदीजी पर, बात बात में आरोप लगाते थे, मोदीजी को मनोरोगी और कायर भी कहा था और यह ऐलान किया था के मोदी और शाह मेरी हत्या कर सकते है| नोटबंदीको हमेशा गलत बतलाया, बालाकोट के सबूत मांगे| तीन सालसे शिकायत करते रहे के मोदी उनको कोई काम करने नही देते|
मगर दिल्ली चुनाव के कुछ महीने पहिले, केजरीवाल ने अपना तरीका बदल दिया | CAA और NRC पर विरोध करना बंद किया, और साथ में, शाहीन बाग पर बैठे विरोधियो का खुलकर समर्थन भी नहीं किया|
जब बीजेपी के मंत्री, प्रवेश वर्माने उनको आतंकवादी कहा तो केजरीवाल ने लोगों से भरी सभा मे कहा के किस कदर इस आरोप से, उनके माता-पिता आहत हुए है| केजरीवाल ने लोगों से संवेदना से जुड़ने की भरपूर कोशिश की| वो लोगोंको सभा में पूछते रहे के क्या दिल्ली वासी उनके बड़े बेटे को आतंकवादी मानती है? इस तरह लोगोमे बीजेपी के प्रति नफरत बनाते गये |
लोगोंसे संवेदना से जुड़ने के लिए उन्होने ये भी कहा: "मै मधुमेह से पीड़ित हु और दिन में चार बार इन्सुलिन लेता हु, ताकि मै आपकी सेवा करता रहु !"
तो इस तरह अरविन्द केजरीवाल ने मौजूदा परिस्थितियों का भरपूर फायदा उठाया और लोगो के दिलो मे बसने का सफल प्रयत्न भी किया|
पर हकीकत यह है की उनको श्रीमती शिला दीक्षित के द्वारा बसा बसाया आर्थिक रूप से, अमीर शहर मिला, जिसको उन्होंने अपनी प्रतिमा बनाने में इस्तेमाल किया| मगर शहर को आर्थिक खायी मे ढकलते गये।
मुफ्त की यह बीमारी आगे दिल्लीवालों के लिए क्या-क्या मुसीबते ला सकती है इस बात का कोई ख्याल न करते हुए केजरीवाल अपनी प्रतिमा बनाने में लगे|
शाहीन बाग में CAA और NPR के विरोध में धरना करने वाले मुस्लिम लोगोंको कांग्रेस दिनके ८०० रु देने की खबरे आयी, तो कुछ शिखोने प्रदर्शनकारियों के लिए लंगर लगाया | इसमें मुस्लिम समाज को बाहरी मुल्कोसे भी आर्थिक मदत मिलती रही है |
शाहीन बाग में CAA और NPR के विरोध में धरना करने वाले मुस्लिम लोगोंको कांग्रेस दिनके ८०० रु देने की खबरे आयी, तो कुछ शिखोने प्रदर्शनकारियों के लिए लंगर लगाया | इसमें मुस्लिम समाज को बाहरी मुल्कोसे भी आर्थिक मदत मिलती रही है |
मगर केजरीवाल इस बात से दूर रहे और दिल्ली पोलिस पर केंद्र सरकार का नियंत्रण है, मै असमर्थ हु, यह कहकर खुदको सलामत रखा|
शाहीन बाग में ८० दिनोसे ज्यादा चल रहे CAA और NRC के विरोध में मुस्लिमों ने धरना जारी रखा है और लोगोंको बड़ी असहूलियत का सामना करना पड़ रहा है| यह धरना CAA और NRC के विरोध में कहा जाता है पर हकीकत में यह कश्मीर से ३७० और ३५अ धारा हटाने जाने पर, अयोध्या में राम मंदिर बनाने के कोर्ट के फैसले और तीन तलाख के फैसले के खिलाफ नाराज होकर, मुस्लिमोंने जारी रखा है ऐसा सरकार का दावा है और लोगों का मानना है | CAA और NRC के बारेमे, हकिकत मे इन प्रदर्शन कारीओंको कोइ लेना देना नही है, हालाके विरोध उसी के नाम से कर रहे है।
पर इसकी परिणति २४ फ़रवरी २०२० को उत्तर पूर्व दिल्ली मे दंगे और आगजनिमें हुई, जिसमे ३७ लोगोंकी मौते हुई, जिनमे अधिकांश लोग हिन्दू थे और कुछ पोलिस अधिकारी भी अपनी जान गवा बैठे |
देश की आझादी से लेकर आज तक अल्पसंख्यांक के नाम पर मुस्लिम समाज को मुफ्त में बहुत कुछ मिलता आया है, फिर भी वो अपना आक्रमक रवैया छोड़ने को तैयार नहीं है|
कही मुफ्त चले कही बिरयानी|
शाहीन बाग में ८० दिनोसे ज्यादा चल रहे CAA और NRC के विरोध में मुस्लिमों ने धरना जारी रखा है और लोगोंको बड़ी असहूलियत का सामना करना पड़ रहा है| यह धरना CAA और NRC के विरोध में कहा जाता है पर हकीकत में यह कश्मीर से ३७० और ३५अ धारा हटाने जाने पर, अयोध्या में राम मंदिर बनाने के कोर्ट के फैसले और तीन तलाख के फैसले के खिलाफ नाराज होकर, मुस्लिमोंने जारी रखा है ऐसा सरकार का दावा है और लोगों का मानना है | CAA और NRC के बारेमे, हकिकत मे इन प्रदर्शन कारीओंको कोइ लेना देना नही है, हालाके विरोध उसी के नाम से कर रहे है।
पर इसकी परिणति २४ फ़रवरी २०२० को उत्तर पूर्व दिल्ली मे दंगे और आगजनिमें हुई, जिसमे ३७ लोगोंकी मौते हुई, जिनमे अधिकांश लोग हिन्दू थे और कुछ पोलिस अधिकारी भी अपनी जान गवा बैठे |
देश की आझादी से लेकर आज तक अल्पसंख्यांक के नाम पर मुस्लिम समाज को मुफ्त में बहुत कुछ मिलता आया है, फिर भी वो अपना आक्रमक रवैया छोड़ने को तैयार नहीं है|
कही मुफ्त चले कही बिरयानी|
जिसके चलते मुस्लिम समाज भारत की आझादी से लेकर आज तक मुफ्त और सौगात की बैसाखी लेकर चल रहा है|
क्यों यह कौम दूसरे धर्म के लोगों को काफिर मानती है? कई सारे सवाल है|
'चुकी हिन्दू की तादात ज्यादा है इसलिए हम असुरक्षित है, हमें रहने में डर लगता है,' जैसी बयानबाजी, बुद्धिजीवी, फिल्मी कलाकार, पढ़े लिखे मुस्लिम, आये दिन सोशल साईट पर करते आये है| हकिकत मे अपनी आबादी हिन्दू से ज्यादा कर के भारत को इस्लाम राष्ट्र बनाने की लगातार कोशिश मुस्लिम कर रहे है, मगर अब हिन्दू भी सोशल साईट के जरिये सारी बाते समझ रहा है, सतर्रक हो रहा है। मुस्लिम तथा उनकी तुष्टिकरण करने वाली कोंग्रेस की चाल को विरोध कर रहा है |
जिस दिन मुस्लिम समाज यह समझ लेगा, मान लेगा, की हिन्दू बहुसंख्यांक ही रहेंगे और फिर भी मुस्लिम को हिन्दू की तरफ से किसी भी तरीके का धोका नहीं होगा और राजकीय पक्षोंकी, फूंट डालो और राज करो वाली निति का मुस्लिम विरोध करेगा, उस दिन न यह 'मुफ्त' चलेगा और न ही 'बिरयानी' |
जय हिन्द, जय भारत !!
'चुकी हिन्दू की तादात ज्यादा है इसलिए हम असुरक्षित है, हमें रहने में डर लगता है,' जैसी बयानबाजी, बुद्धिजीवी, फिल्मी कलाकार, पढ़े लिखे मुस्लिम, आये दिन सोशल साईट पर करते आये है| हकिकत मे अपनी आबादी हिन्दू से ज्यादा कर के भारत को इस्लाम राष्ट्र बनाने की लगातार कोशिश मुस्लिम कर रहे है, मगर अब हिन्दू भी सोशल साईट के जरिये सारी बाते समझ रहा है, सतर्रक हो रहा है। मुस्लिम तथा उनकी तुष्टिकरण करने वाली कोंग्रेस की चाल को विरोध कर रहा है |
जिस दिन मुस्लिम समाज यह समझ लेगा, मान लेगा, की हिन्दू बहुसंख्यांक ही रहेंगे और फिर भी मुस्लिम को हिन्दू की तरफ से किसी भी तरीके का धोका नहीं होगा और राजकीय पक्षोंकी, फूंट डालो और राज करो वाली निति का मुस्लिम विरोध करेगा, उस दिन न यह 'मुफ्त' चलेगा और न ही 'बिरयानी' |
जय हिन्द, जय भारत !!
चिराग बुझ गये घरोके जिस शहरमे
सुना है बीजली मुफ्त है उस शहरमे

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